किसानों और डेयरी सेक्टर को सुरक्षा
पीयूष गोयल के मुताबिक, इस समझौते में डेयरी, मांस, पोल्ट्री, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी और मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा और रागी को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है. इसके अलावा केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी चाय, काबुली चना, मूंग, ऑयल सीड्स, एथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर भी भारतीय हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है. सरकार का जोर इस बात पर रहा कि अमेरिकी आयात से स्थानीय किसानों की आय और बाजार पर नकारात्मक असर न पड़े.
कई कृषि उत्पादों पर जीरो टैरिफ
इस डील के तहत भारत से अमेरिका जाने वाले कई कृषि उत्पादों पर 0 फीसदी टैरिफ लागू होगा. इसमें गेहूं, चावल और तिलहन जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं. इसके अलावा कॉफी, नारियल, नारियल तेल, काजू, एवोकाडो, आम, अमरूद, पपीता, अनानास, कीवी और मशरूम जैसे फूड प्रोडक्ट्स को भी जीरो टैरिफ का फायदा मिलेगा. इससे भारतीय किसानों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को अमेरिकी बाजार में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है.
इंडस्ट्रियल और फार्मा सेक्टर को बड़ी राहत
कृषि के साथ-साथ इंडस्ट्रियल सेक्टर को भी इस समझौते से बड़ा फायदा मिलेगा. स्मार्टफोन, दवाइयों, विमान के पुर्जों, मशीनरी, जेम्स-ज्वेलरी, घड़ियां, एसेंशियल ऑयल और जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स पर टैरिफ घटाकर शून्य किया जाएगा. इसके अलावा कुछ खनिज और प्राकृतिक संसाधनों पर भी 0 फीसदी शुल्क लगेगा. भारतीय रेशम के निर्यात पर भी अमेरिका में कोई ड्यूटी नहीं लगेगी, जिसे सरकार बड़ी उपलब्धि मान रही है.
500 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य की तैयारी
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत-अमेरिका के बीच यह बातचीत फरवरी 2025 में शुरू हुई थी और लक्ष्य सालाना 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का है. उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के बाजार का भारतीय निर्यातकों के लिए खुलना बड़ी बात है. फिलहाल अमेरिका में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ है, जो अगले कुछ दिनों में घटकर 18 फीसदी हो जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि इन रियायतों से आने वाले समय में भारत का अमेरिका को निर्यात 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
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