प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म इंगवर्न ने जी मीडिया एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कंपनी में बढ़ते संकट की ओर इशारा किया है. इंगवर्न के मुताबिक, कंपनी में कॉन्फिडेंस का संकट गहराता जा रहा है, क्योंकि प्रमोटर गोयनका परिवार की हिस्सेदारी 4% से भी कम है, इसके बावजूद वे कंपनी के ऑपरेशंस पर मजबूत नियंत्रण बनाए हुए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमोटर्स की हिस्सेदारी लंबे समय से नहीं बढ़ी है और कंपनी में गंभीर गवर्नेंस वैक्यूम बना हुआ है. इंगवर्न ने यह भी याद दिलाया कि नवंबर 2024 में शेयरधारकों ने पुनित गोयनका की दोबारा डायरेक्टर नियुक्ति को खारिज कर दिया था, इसके बावजूद वे अब भी सीईओ के तौर पर कंपनी का संचालन कर रहे हैं, जिसे शेयरधारकों के फैसले की अनदेखी के रूप में देखा जा रहा है.
प्रमोटर्स का स्टेक पिछले काफी समय से नहीं बढ़ा है. कंपनी में बड़ा गवर्नेंस वैक्यूम है यानी नेतृत्व और शासन में खालीपन सा है. नवंबर 2024 में शेयरधारकों ने पुनित गोयनका की डायरेक्टर के रूप में दोबारा नियुक्ति को ठुकरा दिया था लेकिन वो अभी भी सीईओ के तौर पर कंपनी चला रहे हैं जो शेयरधारकों के फैसले को दरकिनार करने जैसा है.
इंगवर्न ने दिए सुझाव
इंगवर्न ने ये भी कहा कि गोयनका फैमिली के पास करीब 500 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी है जो Zee कंपनी में 5 फीसदी स्टेक खरीदने के लिए काफी है, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और इसे अहम निवेश नहीं माना. आमतौर पर प्रमोटर खरीदारी को पॉजिटिव सिग्नल माना जाता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ. इसलिए इंगवर्न ने सुझाव दिया है कि कंपनी में प्रोफेशनल मैनेजिंग डायरेक्टर की नियुक्ति हो संबंधित पार्टी ट्रांजेक्शंस की फॉरेंसिक ऑडिट हो और अन्य गवर्नेंस सुधार किए जाएं.
कंपनी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. जी मीडिया की ओर से एक प्रवक्ता ने कहा कि ये आरोप फैक्टुअली गलत भ्रामक और पक्षपाती हैं. रिपोर्ट में पुरानी बातें हैं जो कंपनी पहले ही संबोधित कर चुकी है. इसमें कई फैक्टुअल गलतियां हैं फैक्ट्स का गलत तरीके से पेश करना और बेसिक जांच की कमी है जिससे फर्म के इरादे पर सवाल उठते हैं.
शेयरधारकों के लिए चिंता बढ़ी
कंपनी ने इंगवर्न को पहले ही इन बेसलेस आरोपों पर डिटेल्ड रिबूटल भेजा था. कुल मिलाकर ये मामला कंपनी के गवर्नेंस और प्रमोटर कंट्रोल पर विवाद दिखाता है. जी एंटरटेनमेंट पिछले कुछ सालों से कई चुनौतियों से जूझ रही है जैसे मर्जर डील्स का असफल होना और शेयर प्राइस में उतार-चढ़ाव. ये रिपोर्ट शेयरधारकों के लिए चिंता की बात है क्योंकि प्रॉक्सी फर्म्स की सलाह अक्सर इंस्टीट्यूशनल निवेशकों को प्रभावित करती है. कंपनी का कहना है कि सब पुरानी बातें हैं और वो पहले ही उन्हें हैंडल कर चुकी है. बाजार में इस खबर से शेयर में मूवमेंट हो सकता है लेकिन कंपनी ने मजबूती से इनकार किया है.
निवेशकों के लिए ये याद दिलाता है कि मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में गवर्नेंस मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और प्रमोटर-शेयरधारक रिश्ते पर नजर रखनी चाहिए. अगर आप जी के शेयर में निवेश सोच रहे हैं तो लेटेस्ट अपडेट्स चेक करें कंपनी की ऑफिशियल फाइलिंग्स देखें और अपनी पूरी रिसर्च करें क्योंकि स्टॉक मार्केट में जोखिम हमेशा रहता है और कोई भी फैसला अपनी जिम्मेदारी पर लें. ये विवाद अभी चल रहा है और आगे क्या होता है ये देखना होगा लेकिन कंपनी ने साफ कहा है कि आरोप गलत हैं.
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