सोने की कीमतों में 15% गिरावट के बाद RBI ने गोल्ड लोन पोर्टफोलियो पर सख्त निगरानी शुरू की है, जिससे मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ा है.
आरबीआई यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सोने के दाम गिरने से बैंकों और फाइनेंस कंपनियों की एसेट क्वालिटी पर बुरा असर न पड़े. जब सोने की कीमतें गिरती हैं, तो कर्ज की राशि और गिरवी रखे सोने की वैल्यू का अनुपात (LTV) गड़बड़ा जाता है. इसी चिंता के बीच शेयर बाजार में मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसी दिग्गज गोल्ड लोन कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई है.
कीमतों में गिरावट से बढ़ा रिस्क
आरबीआई की इस विशेष निगरानी के पीछे कई अहम कारण और संभावित खतरे हैं, जिन्हें समझना जरूरी है:
- LTV रेशियो का खतरा: नियमों के मुताबिक गोल्ड लोन की वैल्यू गिरवी रखे सोने के दाम के 75% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. सोने के दाम 15% गिरने से कई पुराने लोन इस सीमा को पार कर सकते हैं, जिससे डिफॉल्ट का खतरा बढ़ जाता है.
- पोर्टफोलियो की कृत्रिम ग्रोथ: पिछले साल गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में जो बढ़त दिखी थी, वह नए ग्राहकों से ज्यादा सोने की बढ़ती कीमतों की वजह से थी. अब कीमतें गिरने से यह ‘बैलून’ पिचकने का डर है.
- सख्त नियमों की तैयारी: 1 अप्रैल 2026 से आरबीआई के नए दिशा-निर्देश लागू होने वाले हैं. इसमें शुद्धता के मानकों और समय-समय पर वैल्यूएशन की मॉनिटरिंग को लेकर बहुत कड़े नियम बनाए गए हैं.
कर्ज देने वाले संस्थानों पर क्या होगा असर?
इस निगरानी का असर सीधे तौर पर उन कंपनियों पर पड़ेगा जिनका पूरा बिजनेस गोल्ड लोन पर टिका है. आरबीआई अब इन संस्थानों से डेटा मांग सकता है या उनके पोर्टफोलियो का स्ट्रेस टेस्ट कर सकता है. अगर कीमतें इसी तरह अस्थिर रहीं, तो कंपनियों को ग्राहकों से अतिरिक्त मार्जिन या सोना जमा करने को कहना पड़ सकता है.
बाजार के जानकारों का मानना है कि आरबीआई की यह सक्रियता भविष्य में किसी बड़े वित्तीय संकट को टालने के लिए है. खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जहां गोल्ड लोन बहुत लोकप्रिय है, वहां कर्जदारों और कंपनियों के बीच तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती होगी.
गोल्ड लोन मार्केट: मौजूदा स्थिति
| मुख्य बिंदु | ताजा अपडेट | संभावित प्रभाव |
| सोने की कीमत | 30 जनवरी से 15% की गिरावट | कोलैटरल वैल्यू में कमी |
| आरबीआई का रुख | क्लोज मॉनिटरिंग (सख्त निगरानी) | ऑडिट और डेटा जांच बढ़ेगी |
| प्रभावित कंपनियां | मुथूट, मणप्पुरम और प्रमुख बैंक | स्टॉक की कीमतों पर दबाव |
| नया फ्रेमवर्क | 1 अप्रैल 2026 से लागू | रिस्क मैनेजमेंट और सख्त होगा |
सोने की कीमतों में आई 15% की अचानक गिरावट ने आरबीआई को सतर्क कर दिया है, जिसके बाद बैंकों और एनबीएफसी के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की कड़ी निगरानी शुरू कर दी गई है. आरबीआई का मुख्य उद्देश्य गिरती कीमतों की वजह से बैंकों के फंसे हुए कर्ज (NPA) को बढ़ने से रोकना है. इस खबर के बाद गोल्ड लोन सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में हलचल तेज हो गई है. 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियम और मौजूदा मॉनिटरिंग यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में गोल्ड लोन लेना और देना, दोनों ही अधिक कड़े नियमों के दायरे में होंगे.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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