नए ड्राफ्ट के मुताबिक, अगर किसी ग्राहक के साथ यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट-क्रेडिट कार्ड या एटीएम ट्रांजैक्शन के जरिए फ्रॉड होता है, तो उसके लिए बैंक और सिस्टम की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा स्पष्ट होगी.
किन ट्रांजैक्शन पर लागू होंगे नियम
आरबीआई के प्रस्ताव के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन में ये सभी शामिल होंगे. यह नियम मुख्य रूप से कमर्शियल बैंकों पर लागू होंगे.
- UPI पेमेंट
- इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग
- डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट
- ATM से ट्रांजैक्शन
ऑथराइज्ड और अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन क्या होगा
- ऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन: जब ग्राहक OTP, PIN, पासवर्ड या कार्ड डिटेल देकर खुद पेमेंट करता है.
- फ्रॉड ट्रांजैक्शन: अगर किसी ने धोखे से ग्राहक के OTP या डिटेल हासिल कर ली, ग्राहक को दबाव या धोखे में पैसा भेजने पर मजबूर किया गया, स्कैमर ने खुद को असली व्यक्ति या संस्था बताकर पैसा ट्रांसफर करवाया तो ऐसे मामलों को भी फ्रॉड माना जा सकता है.
बैंक और ग्राहक की लापरवाही भी तय होगी
बैंक की लापरवाही-
- सुरक्षित सिस्टम न होना
- ट्रांजैक्शन अलर्ट न भेजना
- फ्रॉड रिपोर्ट करने का सिस्टम न देना
ग्राहक की लापरवाही-
- OTP या पासवर्ड शेयर करना
- बैंक की फ्रॉड चेतावनी को नजरअंदाज करना
- संदिग्ध ऐप डाउनलोड करना
थर्ड पार्टी की गलती भी होगी शामिल
कई बार समस्या बैंक या ग्राहक से नहीं बल्कि सिस्टम के दूसरे हिस्सों से होती है, जैसे- पेमेंट गेटवे, टेलीकॉम सर्विस, थर्ड पार्टी ऐप. ऐसे मामलों को थर्ड-पार्टी ब्रीच माना जाएगा.
छोटे फ्रॉड पर मिल सकता है मुआवजा
आरबीआई ने छोटे डिजिटल फ्रॉड के लिए एक मुआवजा व्यवस्था भी प्रस्तावित की है. अगर ग्राहक को 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है तो उसे 85% नुकसान या मैक्सिमम 25,000 रुपये (जो कम हो) मिल सकता है. यह सुविधा जीवन में एक बार मिलेगी. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि ग्राहक 5 दिन के अंदर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें.
एक्सपर्ट क्या कहते हैं
पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये प्रस्ताव डिजिटल पेमेंट सिस्टम में भरोसा बढ़ाने के लिए अहम कदम है. इससे ग्राहकों को फ्रॉड के मामलों में राहत मिल सकती है और बैंक भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए मजबूर होंगे.
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