भारतीय फुटवियर ब्रांड रेडटेप में बड़े बदलाव की तैयारी की खबरों से बाजार में हलचल मच गई है. कंपनी के फाउंडर्स अपनी हिस्सेदारी बेचने के विकल्प तलाश रहे हैं और वैश्विक निवेशकों से बातचीत चल रही है. इस संभावित डील की वैल्यू करीब 500 मिलियन डॉलर तक आंकी जा रही है.
ब्लैकस्टोन और KKR से शुरुआती बातचीत
सूत्रों के अनुसार, रेडटेप के फाउंडर्स ने वैश्विक प्राइवेट इक्विटी दिग्गज ब्लैकस्टोन और KKR से संभावित डील को लेकर बातचीत शुरू की है. इस पूरी प्रक्रिया के लिए अर्न्स्ट एंड यंग (EY) को एक्सक्लूसिव फाइनेंशियल एडवाइजर नियुक्त किया गया है. फिलहाल यह प्रक्रिया नॉन-बाइंडिंग ऑफर के शुरुआती चरण में बताई जा रही है, यानी निवेशकों की रुचि और वैल्यूएशन को परखा जा रहा है.
स्टेक सेल की खबर से शेयर में जबरदस्त उछाल
हिस्सेदारी बिक्री की खबर सामने आते ही रेडटेप के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला. इंट्राडे ट्रेड में शेयर करीब 16 फीसदी तक चढ़ गया, जो कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा इंट्राडे गेन माना जा रहा है. हालांकि बाजार बंद होने तक शेयर करीब 11 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ. गौर करने वाली बात यह है कि 2025 में रेडटेप का शेयर करीब 28 फीसदी टूट चुका था, ऐसे में यह खबर निवेशकों के लिए राहत लेकर आई.
कितनी हिस्सेदारी की हो सकती है बिक्री
मौजूदा बाजार कीमत के आधार पर रेडटेप में 50 फीसदी हिस्सेदारी की वैल्यू करीब 355 मिलियन डॉलर बताई जा रही है. वहीं, मिर्जा परिवार की कुल 71.7 फीसदी हिस्सेदारी की कीमत लगभग 509 मिलियन डॉलर आंकी गई है. सितंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, शुजा मिर्जा के पास कंपनी में 35.79 फीसदी और यास्मिन मिर्जा के पास 22.52 फीसदी हिस्सेदारी है. ऐसे में फाउंडर्स के पूरी तरह एग्जिट करने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं.
कड़ा मुकाबला और वित्तीय दबाव
1996 में स्थापित रेडटेप भारत के बेहद प्रतिस्पर्धी फुटवियर और अपैरल बाजार में काम करती है. कंपनी का मुकाबला नाइकी, एडिडास, बाटा इंडिया और कैंपस एक्टिववियर जैसे बड़े ब्रांड्स से है. हालांकि रेडटेप की पहचान लेदर शूज से बनी, लेकिन अब कंपनी स्नीकर्स, शर्ट्स, वॉलेट और बेल्ट जैसे प्रोडक्ट्स में भी मौजूद है. भारत में इसके 600 से ज्यादा रिटेल स्टोर्स हैं और यह 14 देशों में कारोबार करती है. वित्तीय मोर्चे पर FY25 में कंपनी की आय 9.7 फीसदी बढ़कर 223.9 मिलियन डॉलर रही, लेकिन मुनाफा 3.5 फीसदी घटकर 18.8 मिलियन डॉलर रह गया. यही वजह है कि रणनीतिक निवेशक या नए मालिक की एंट्री को कंपनी के अगले ग्रोथ फेज से जोड़कर देखा जा रहा है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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