अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.4 प्रतिशत गिरकर 5058.64 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया. अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स अप्रैल डिलीवरी 0.3 प्रतिशत नीचे आकर 5080 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ. चांदी ज्यादा गिरावट दिखाई दी और स्पॉट सिल्वर 1.4 प्रतिशत कम होकर 82.87 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. इससे पहले बुधवार को चांदी में करीब 4 प्रतिशत की तेजी आई थी लेकिन मजबूत अमेरिकी डेटा से मुनाफा वसूली हुई.
आज सोने-चांदी का रेट
भारत में एमसीएक्स पर भी सोना और चांदी पर असर पड़ा लेकिन घरेलू बाजार में कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्भर करती हैं. आज एमसीएक्स पर सोने का रेट 1700 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी के साथ 154519 रुपये पर आ गया है. वहीं, चांदी 4600 रुपये प्रति किलोग्राम की तेजी के साथ आज शुक्रवार को ट्रेड कर रही है. चांदी का भाव आज 241393 रुपये प्रति किलो पर है.
अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी का भाव
मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में 22 कैरेट सोना 1,45,190 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 1,58,390 रुपये प्रति 10 ग्राम है. पुणे और बेंगलुरु में 24 कैरेट सोना 1,58,390 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,45,190 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर उपलब्ध है. दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 158540 रुपये प्रति 10 ग्राम है और 22 कैरेट का भाव 145340 रुपये प्रति 10 ग्राम है. चांदी में 13 फरवरी की सुबह तेजी है. कीमत 295100 रुपये प्रति किलोग्राम पर है.
सोने-चांदी पर किस वजह से आया दबाव?
अमेरिका में जनवरी के लिए नॉनफार्म पेरोल्स डेटा उम्मीद से बेहतर आया. वहां 1,30,000 नई नौकरियां जुड़ीं जबकि विशेषज्ञों को सिर्फ 70,000 के आसपास की उम्मीद थी. बेरोजगारी दर थोड़ी कम होकर 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गई. इससे पहले के महीनों में भी संशोधन हुआ जहां 2025 में कुल 1,81,000 नौकरियां जुड़ीं जो पहले के अनुमान से कम थीं लेकिन जनवरी का आंकड़ा मजबूत दिखा. इससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स दो दिन से लगातार मजबूत हुआ. मजबूत डॉलर से सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं क्योंकि दूसरे मुद्रा वाले लोग कम खरीद पाते हैं. साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स भी बढ़े जिससे बिना ब्याज वाले सोने पर दबाव पड़ा.
यह डेटा फेडरल रिजर्व की नीति पर असर डाल रहा है. बाजार अब मान रहा है कि फेड जल्दी दरें कम नहीं करेगा बल्कि लंबे समय तक उच्च दरें रख सकता है. इससे सोने जैसी सुरक्षित संपत्ति की मांग थोड़ी कम हुई क्योंकि उच्च ब्याज दरों में बॉन्ड ज्यादा आकर्षक लगते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सोने को 6000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने के लिए बहुत बड़ी संकट जैसी स्थिति चाहिए जैसे डॉलर में तेज कमजोरी, आक्रामक दर कट, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी, महंगाई का डर या बड़ा भू-राजनीतिक झटका. वीटी मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी लीड रॉस मैक्सवेल ने कहा कि पिछले 18-24 महीनों में सोना बहुत चढ़ चुका है इसलिए बिना बड़े ग्लोबल डिसरप्शन के 6000 डॉलर दूर लगता है लेकिन लंबे समय में डी-डॉलराइजेशन, महंगाई और रिजर्व विविधीकरण से सपोर्ट मिल सकता है. भू-राजनीतिक तनाव जैसे ईरान से जुड़े मुद्दे सोने को कुछ सपोर्ट देते रहते हैं लेकिन मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था से फिलहाल दबाव है. सोने-चांदी में निवेश करने वाले लोगों को आने वाले डेटा पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि कीमतें जल्दी बदल सकती हैं.
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