Sumpreme Order : शीर्ष अदालत ने एक आदेश में कहा है कि अगर कोई व्यक्ति अपने मकान या फ्लैट को किराये पर देता है तो भी उसके उपभोक्ता हित सुरक्षित होंगे. उसे उपभोक्ता की श्रेणी से बाहर नहीं किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने किराये पर मकान देने वाले खरीदार को भी उपभोक्ता माना है.
उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि किसी रिहायशी फ्लैट को किराये पर या पट्टे पर देने भर से उसका खरीदार उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ‘उपभोक्ता’ की श्रेणी से बाहर नहीं हो जाता है. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी खरीदार को ‘वाणिज्यिक उद्देश्य’ के आधार पर उपभोक्ता की परिभाषा से बाहर करने के लिए बिल्डर को यह साबित करना होगा कि फ्लैट खरीदने का प्रमुख उद्देश्य व्यावसायिक था, न कि उसका खुद इस्तेमाल करना.
कोर्ट ने बताई उपभोक्ता की परिभाषा
पीठ ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा दो(1)(डी) के तहत ‘उपभोक्ता’ वह व्यक्ति है, जो किसी वस्तु को मूल्य देकर खरीदता है या सेवाएं प्राप्त करता है. हालांकि, पुनर्विक्रय या किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए सामान खरीदने वाला व्यक्ति इसकी परिभाषा से बाहर है. इस मामले में फ्लैट को पट्टे पर देने भर से यह नहीं पता चलता है कि अपीलकर्ता ने संपत्ति को प्रमुख रूप से वाणिज्यिक गतिविधि में संलग्न होने के उद्देश्य से खरीदा था. लिहाजा उसे उपभोक्ता की श्रेणी से बाहर नहीं किया जा सकता है.
व्यावसाहित हितों के अलग-अलग पहलू
पीठ ने यह भी कहा कि ‘व्यावसायिक उद्देश्य’ हरेक मामले की परिस्थितियों के आधार पर तथ्यात्मक रूप से तय किया जाना चाहिए. यह आदेश विनीत बहरी की अपील पर पारित किया गया, जिन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें फ्लैट किराये पर दिए जाने को व्यावसायिक उद्देश्य मानते हुए उनकी शिकायत खारिज कर दी गई थी. राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने भी उन्हें उपभोक्ता मानने से इनकार किया था और बिल्डर के हित में फैसला सुनाया था.
क्या होगा फैसले का असर
शीर्ष अदालत के इस फैसले से उन मकान खरीदारों को राहत मिली है, जो अपने फ्लैट या मकान को किराये पर देकर आमदनी कमाते हैं. बिल्डर ने इसी बात का फायदा उठाकर अपीलकर्ता विनीत के खिलाफ उपभोक्ता अदालतों में माहौल बनाया था कि उन्होंने यह फ्लैट खरीदा ही था किराये पर देकर पैसा कमाने के लिए. लिहाजा मकान में आई कमी के लिए उन्हें उपभोक्ता मानकर मुआवजा नहीं दिया जा सकता है. हालांकि, शीर्ष अदालत के फैसले से साफ हो गया है कि भले ही मकान खरीदने वाले ने उसे किराये पर दे दिया है, लेकिन उसके उपभोक्ता के हित फिर भी बने रहेंगे.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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