ताइवान के अधिकारियों ने वनप्लस के सीईओ पीट लाउ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. आरोप है कि कंपनी ने ताइवान में अवैध रूप से इंजीनियरों की भर्ती और गुप्त ब्रांच खोली. माना जा रहा है कि ताइवान के इस कदम से दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी को लेकर टेंशन और ज्यादा बढ़ सकती है.
अभियोजकों के मुताबिक, वनप्लस ने वर्ष 2015 में हांगकांग में एक शेल कंपनी बनाई थी. इसी कंपनी के जरिए ताइवान में एक गुप्त ब्रांच तैयार की गई, जिसका उद्देश्य स्मार्टफोन के रिसर्च और डेवलपमेंट का काम करना बताया गया. आरोप है कि इस व्यवस्था को इस तरह डिजाइन किया गया ताकि कंपनी का चीनी स्वामित्व छिपा रहे. इस पूरे नेटवर्क को खड़ा करने में मदद करने वाले दो ताइवानी नागरिकों पर पहले ही केस दर्ज हो चुका है. इन दोनों के उपनाम लिन और चेंग बताए गए हैं, जो भर्ती प्रक्रिया से जुड़े हुए थे.
क्या सिर्फ कानूनी उल्लंघन का है मामला?
यह मामला सिर्फ कानूनी उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि ताइवान की उस चिंता को भी दिखाता है जिसमें वह अपने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत तकनीकी क्षेत्रों की प्रतिभा को सुरक्षित रखना चाहता है. बीते कुछ वर्षों में ताइवान ने चीनी कंपनियों द्वारा गुप्त तरीके से इंजीनियरों की भर्ती पर सख्ती बढ़ाई है, क्योंकि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है. अभी तक वनप्लस की ओर से इस गिरफ्तारी वारंट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका असर कंपनी की अंतरराष्ट्रीय छवि और साझेदारियों पर पड़ सकता है.
गिरफ्तारी वारंट जारी होने का यह मतलब नहीं है कि पीट लाउ को तुरंत पकड़ा ही जाएगा. ताइवान और चीन के बीच कोई औपचारिक प्रत्यर्पण संधि नहीं है. लाउ को तब ही हिरासत में लिए जाने का खतरा होगा, जब वे ताइवान या उसके किसी सहयोगी क्षेत्र में प्रवेश करेंगे. फिर भी, यह कदम प्रतीकात्मक रूप से काफी अहम माना जा रहा है और इससे चीन-ताइवान रिश्तों में नई तल्खी देखने को मिल सकती है.
क्या चीन को ब्लॉक कर रहा ताइवान?
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे दोनों देशों के तनावपूर्ण संबंध भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. ताइवान खुद को एक स्वतंत्र लोकतंत्र मानता है, जबकि चीन ‘वन चाइना’ पॉलिसी पर अड़ा हुआ है. ऐसे माहौल में ताइवान अपनी तकनीकी क्षमता और प्रतिभाशाली मानव संसाधन को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठा रहा है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह कार्रवाई चीनी कंपनियों द्वारा इंजीनियरों की अवैध भर्ती रोकने की दिशा में की गई है. वहीं, इकोनॉमिक टाइम्स ने इसे ‘चीन को ब्लॉक करने का नवीनतम कदम’ बताया है. टेकमेमे और याहू फाइनेंस की रिपोर्ट्स में भी इसे चीन-ताइवान के बीच चल रही टेक्नोलॉजी वॉर का हिस्सा माना गया है, जहां ताइवान अपनी टैलेंट पूल और रणनीतिक उद्योगों की रक्षा करना चाहता है.
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मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे …और पढ़ें
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