Home Loan Tax Deduction : वित्तमंत्री ने बजट में होम लोन लेने वालों को बड़ा तोहफा दिया है. अब मकान खरीदार उस ब्याज पर भी टैक्स छूट क्लेम कर पाएंगे जो निर्माण के दौरान अथवा पजेशन से पहले चुकाया गया था.
इनकम टैक्स कानून की धारा 24बी के तहत होम लोन के ब्याज पर सालाना 2 लाख रुपये तक टैक्स छूट दी जाती है. वित्तवर्ष 2026-27 के बजट में प्रस्ताव दिया गया है कि स्वयं के कब्जे वाली संपत्ति के मामले में होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख रुपये तक की आयकर कटौती में अब संपत्ति के अधिग्रहण या निर्माण से पहले दिया गया ब्याज भी शामिल किया जाएगा. इसका मतलब है कि मकान या फ्लैट बनाने के दौरान दिए गए ब्याज पर भी हर साल 2 लाख रुपये तक टैक्स छूट को क्लेम किया जा सकेगा.
सरकार बदलेगी कानून
इस उद्देश्य के लिए सरकार आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 22(2) में संशोधन करेगी. इससे एक अप्रैल 2026 से लागू नए कर कानून के तहत होम लोन लेने वाले करदाताओं को राहत जारी रहेगी. बजट दस्तावेज के अनुसार, आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 22 हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली कमाई के मामले में मिलने वाली कटौतियों से संबंधित है. अभी तक अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग में फ्लैट खरीदने वालों को होम लोन का पुनर्भुगतान तो पजेशन से पहले ही करना पड़ता था, लेकिन उस चुकाए गए ब्याज पर 24बी के तहत टैक्स छूट नहीं मिलती थी. अब वित्तमंत्री ने ऐलान किया है कि नए वित्तवर्ष से इसपर टैक्स छूट दी जाएगी.
अभी क्या है छूट का नियम
इनकम टैक्स के सेक्शन 24बी के तहत अभी ब्याज पर टैक्स डिडक्शन तभी मिलता है, जब प्रॉपर्टी पूरी हो जाएगी और उस पर आपका पजेशन मिल जाए. अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग के लिए चुकाए ब्याज पर कोई सीधी टैक्स छूट नहीं मिलती है. आप आईटीआर में इसे क्लेम भी नहीं कर सकते हैं. हालांकि, पजेशन या निर्माण पूरा होने के बाद इस दौरान चुकाए सारे ब्याज जमा हो जाते हैं और उसे 5 बराबर किस्तों में क्लेम किया जा सकता है. हालांकि, पजेशन मिलने के बाद पहले के और बाद के चुकाए गए ब्याज पर मिलने वाली कुल टैक्स छूट की लिमिट 2 लाख रुपये ही रहेगी. यही वजह है कि ज्यादातर मामलों में पहले चुकाए ब्याज पर पूरी टैक्स छूट नहीं मिल पाती है.
5 साल में पूरा होना चाहिए निर्माण
अभी अंडर कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग पर चुकाए गए ब्याज पर टैक्स छूट तभी क्लेम कर सकते हैं, जब उसका निर्माण 5 साल के भीतर पूरा हो जाए. इन 5 वर्षों के दौरान चुकाए गए कुल ब्याज को अगले 5 साल तक क्लेम किया जा सकता है. इस दौरान आप पुराने ब्याज और पजेशन के बाद चुकाए गए ब्याज दोनों पर एकसाथ टैक्स क्लेम कर सकते हैं. हालांकि, क्लेम की यह राशि एक वित्तवर्ष में 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होगी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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