ट्रंप ने कहा कि वे किसी ऐसे व्यक्ति को चाहते थे जो अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए और मुद्रास्फीति पर काबू पाए. वॉर्श को ट्रंप का करीबी माना जाता है और वे पहले भी दो बार इस पद के लिए फाइनलिस्ट रह चुके हैं. अब आइए जानते हैं केविन वॉर्श के बारे में वो पांच खास बातें जो उन्हें इस बड़े पद के लिए योग्य बनाती हैं.
केविन वॉर्श का करियर
पहली बात, केविन वॉर्श की शिक्षा और शुरुआती करियर काफी प्रभावशाली है. वे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं और हार्वर्ड लॉ स्कूल से लॉ की डिग्री ली है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वॉल स्ट्रीट पर काम किया, जहां मॉर्गन स्टेनली जैसी बड़ी कंपनी में एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम किया. यहां उन्होंने निवेश और आर्थिक नीतियों पर गहरा अनुभव हासिल किया. जॉर्ज डब्ल्यू बुश के प्रशासन में वे आर्थिक सलाहकार बने और राष्ट्रीय आर्थिक परिषद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह अनुभव उन्हें फेडरल रिजर्व जैसे संस्थान के लिए तैयार करने में मददगार साबित हुआ. वॉर्श हमेशा से ही स्मार्ट और मेहनती व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं, जो जटिल आर्थिक मुद्दों को आसानी से समझते हैं.
फेडरल रिजर्व में काम करने का अनुभव
दूसरी खास बात उनके फेडरल रिजर्व में काम करने का अनुभव है. 2006 में, जब वे सिर्फ 35 साल के थे, तब उन्हें फेडरल रिजर्व के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में नियुक्त किया गया. यह इतिहास में सबसे कम उम्र के गवर्नर बनने का रिकॉर्ड है. उन्होंने 2011 तक इस पद पर रहते हुए 2008 की वैश्विक वित्तीय संकट का सामना किया. उस समय उन्होंने फेड को संकट से उबारने में अहम भूमिका निभाई, जैसे बैंकों को सहायता प्रदान करना और अर्थव्यवस्था को स्थिर करना. वॉर्श को मुद्रास्फीति का दुश्मन माना जाता है, यानी वे हमेशा कीमतों पर काबू रखने की वकालत करते हैं. लेकिन ट्रंप के साथ काम करते हुए उन्होंने ब्याज दरों को बढ़ाने पर भी जोर दिया, खासकर जब टैरिफ जैसे फैसलों से अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही थी. उनका यह अनुभव दिखाता है कि वे बड़े संकटों में कैसे फैसले लेते हैं.
वॉर्श की आर्थिक नीतियों पर राय
केविन वॉर्श की आर्थिक नीतियों पर उनकी सोच काफी अलग है. वे एक इंफ्लेशन हॉक हैं, मतलब महंगाई को कंट्रोल करने में सख्त रुख अपनाते हैं. लेकिन वे ट्रंप की नीतियों से भी जुड़े हुए हैं, जैसे व्यापार और टैरिफ पर. ट्रंप ने पॉवेल से शिकायत की थी कि वे ब्याज दरें नहीं घटा रहे थे, लेकिन केविन वॉर्श शायद ट्रंप की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे. वे मानते हैं कि फेड को स्वतंत्र रहना चाहिए, लेकिन राष्ट्रपति की आर्थिक योजनाओं से तालमेल रखना भी जरूरी है. हाल के सालों में उन्होंने हूवर इंस्टीट्यूशन में इकोनॉमिक्स फेलो के तौर पर काम किया और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में लेक्चरर हैं. यहां वे छात्रों को आर्थिक नीतियों के बारे में पढ़ाते हैं और रिसर्च करते हैं. उनकी सोच है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सख्त मौद्रिक नीति अपनानी चाहिए.
ट्रंप के करीबी सलाहकार हैं केविन वॉर्श
चौथी खास बात ट्रंप से उनका रिश्ता है. केविन वॉर्श ट्रंप के करीबी सलाहकार रहे हैं और आर्थिक नीतियों पर सलाह देते रहे हैं. 2017 में जब ट्रंप ने फेड चेयर चुनना था, तब वॉर्श फाइनलिस्ट थे लेकिन पॉवेल चुने गए. अब दूसरी बार वे फिर फाइनलिस्ट बने और इस बार नामित हो गए. ट्रंप ने कहा कि वे किसी ऐसे व्यक्ति को चाहते थे जो पहले भी हो सकता था. वॉर्श ने ट्रंप को अर्थव्यवस्था, व्यापार और महंगाई पर सलाह दी है. उनका यह रिश्ता दिखाता है कि वे राजनीतिक और आर्थिक दुनिया दोनों को अच्छे से समझते हैं. ट्रंप ने अपनी घोषणा में कहा कि वॉर्श सबसे अच्छे फेड चेयर बन सकते हैं. यह नॉमिनेशन ट्रंप की टीम द्वारा सितंबर से शुरू की गई खोज का नतीजा है, जहां ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कई उम्मीदवारों को चुना.
केविन वॉर्श ला सकते हैं बड़ा बदलाव
अगर सीनेट केविन वॉर्श को मंजूरी देती है, तो वॉर्श मई 2026 से पद संभालेंगे और चार साल तक रहेंगे. वे वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले फैसले लेंगे, जैसे ब्याज दरें तय करना और संकटों से निपटना. लेकिन चुनौतियां भी हैं, जैसे फेड की स्वतंत्रता बनाए रखना जबकि ट्रंप जैसे राष्ट्रपति दबाव डालते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वॉर्श को अनुभव है और वे बदलाव ला सकते हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट में उन्हें चेमेलियन भी कहा गया है क्योंकि वे अलग-अलग स्थितियों में ढल जाते हैं, लेकिन ज्यादातर उन्हें ठोस पिक मानते हैं. वॉर्श का मानना है कि फेड को वैश्विक संकटों में बचाव की भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन सावधानी से. उनका यह पद अमेरिका ही नहीं, दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डालेगा, खासकर भारत जैसे देशों पर जहां डॉलर की मजबूती से निर्यात प्रभावित होता है.
केविन वॉर्श की यह नियुक्ति अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए एक नया मोड़ हो सकती है. ट्रंप ने उन्हें चुनकर अपनी पुरानी नाराजगी को दूर करने की कोशिश की है. अब देखना यह है कि सीनेट क्या फैसला लेती है और वॉर्श कैसे काम करते हैं. उनके अनुभव से लगता है कि वे इस जिम्मेदारी को अच्छे से निभाएंगे. अमेरिका की यह खबर दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि फेड के फैसले ग्लोबल मार्केट को प्रभावित करते हैं.
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