ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई. आठ नाटो देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी के बाद वॉल स्ट्रीट में जोरदार बिकवाली देखने को मिली. इस सख्त रुख ने अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक तनाव को और बढ़ा दिया है.
वॉल स्ट्रीट में तेज गिरावट
मंगलवार को शुरुआती ट्रेडिंग में एसएंडपी 500 करीब 1.3 प्रतिशत टूट गया. डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 642 अंक यानी 1.3 प्रतिशत गिरा, जबकि नैस्डैक कंपोजिट में 1.5 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई. ट्रंप के बयान का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बॉन्ड मार्केट में ट्रेजरी यील्ड्स ऊपर जाती दिखीं. निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और कमजोर हो गया.
किन देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा. ट्रंप का आरोप है कि इन देशों ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की उनकी कोशिशों का विरोध किया है. ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है और इसी मुद्दे को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है.
यूरोप और वैश्विक बाजारों पर असर
ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद यूरोपीय शेयर बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली. निवेशकों को डर है कि अगर अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. खास बात यह है कि यूरोपीय यूनियन देशों से अमेरिका का कुल सालाना आयात, मैक्सिको और चीन जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों से भी ज्यादा है. ऐसे में टैरिफ लागू होने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है.
ग्रीनलैंड और नोबेल विवाद की पृष्ठभूमि
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने आक्रामक रुख को पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से भी जोड़ा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को भेजे एक संदेश में कहा कि अब उन्हें ‘सिर्फ शांति के नजरिए से सोचने का दायित्व’ महसूस नहीं होता. इस बयान ने कूटनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है. जानकारों का मानना है कि अगर बयानबाजी और टैरिफ की धमकियां इसी तरह जारी रहीं, तो आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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