Wholesale Inflation Data : वाणिज्य मंत्रालय ने थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं और इसमें एक बार फिर उछाल आना शुरू हो गया है. इससे पहले खुदरा महंगाई के आंकड़ों में भी उछाल दिखा है.
उद्योग मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2025 में महंगाई दर में बढ़ोतरी मुख्य रूप से अन्य विनिर्माण, खनिजों, मशीनरी एवं उपकरणों के विनिर्माण, खाद्य उत्पादों के निर्माण और वस्त्र आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है. डब्ल्यूपीआई के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतें 0.43 फीसदी कम हुईं जबकि नवंबर में यह दर 4.16 फीसदी थी. सब्जियों की महंगाई दर में दिसंबर में 3.50 फीसदी की गिरावट आई जबकि नवंबर में यह 20.23 फीसदी थी.
मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट में बढ़ी महंगाई
वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि दिसंबर में विनिर्मित उत्पादों के मामले में महंगाई नवंबर 2025 के 1.33 फीसदी के मुकाबले दिसंबर में 1.82 फीसदी रही. गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी की महंगाई दर दिसंबर में 2.95 फीसदी रही, जबकि नवंबर में यह 2.27 फीसदी थी. ईंधन और बिजली क्षेत्रों में महंगाई दर दिसंबर में 2.31 फीसदी रही जबकि नवंबर में यह 2.27 फीसदी थी. यही वजह है कि इसका असर थोक महंगाई पर भी ज्यादा दिखा है.
खाने-पीने की चीजों पर असर
सब्जी, अंडा और दाल समेत रसोई की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण बीते महीने दिसंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर तीन महीने के उच्च स्तर 1.33 फीसदी पर पहुंच गई थी. नवंबर में यह महंगाई दर 0.71 फीसदी थी. इससे पहले पिछला उच्च स्तर सितंबर में 1.44 फीसदी दर्ज किया गया था. सरकार ने इस सप्ताह ही इस संबंध में आंकड़े जारी किए थे. चौंकाने वाली बात ये है कि खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई दर में भी उछाल दिख रहा है.
आरबीआई रखता है खास नजर
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) खुदरा महंगाई पर नजर रखता है. केंद्रीय बैंक ने चालू वित्तवर्ष में अभी तक नीतिगत दर यानी रेपो रेट में 1.25 फीसदी की कटौती है जो अब 5.5 फीसदी है. रेपो रेट घटाने के लिए आरबीआई सबसे पहले खुदरा महंगाई के आंकड़े ही देखता है. एक्सपर्ट का अनुमान है कि आरबीआई एक बार फिर रेपो रेट में कटौती कर सकता है. जाहिर है कि इसके लिए खुदरा महंगाई दर कम रहना जरूरी है. वैसे आरबीआई ने पिछले महीने चालू वित्तवर्ष के लिए महंगाई दर के अनुमान को पहले के 2.6 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया था. साथ ही वित्तवर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का अपना अनुमान पहले के 6.8 फीसदी से बढ़ाकर 7.3 फीसदी कर दिया है. भारत ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 8.2 फीसदी और अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की थी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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