पैसिव इनकम का मतलब ऐसी कमाई से है, जिसमें एक बार सही निवेश करने के बाद तय समय पर पैसा मिलता रहता है. किराया, ब्याज, डिविडेंड और पेंशन जैसी आमदनी इसी कैटेगरी में आती है. रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा बनाए रखने के लिए पैसिव इनकम को बेहद जरूरी माना जाता है.
सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम
रिटायर लोगों के लिए सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) एक सुरक्षित ऑप्शन है. यह सरकारी योजना है, जिसमें फिलहाल करीब 8.2 फीसदी ब्याज मिलता है. इसमें मैक्सिमम 30 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है और अवधि 5 साल की होती है. इसकी खास बात यह है कि ब्याज हर 3 महीने सीधे बैंक खाते में जमा होता है, जिससे नियमित इनकम बनी रहती है.
किराया से कमाई
अगर किसी के पास घर, फ्लैट या दुकान है, तो उसे किराए पर देना भी रिटायरमेंट के बाद मजबूत आमदनी का जरिया बन सकता है. हर महीने तय किराया मिलने से रोजमर्रा के खर्च आसानी से पूरे हो जाते हैं. हालांकि, इसके लिए सही लीज एग्रीमेंट और किराएदार की जांच जरूरी होती है.
डिविडेंड देने वाले शेयर और म्यूचुअल फंड
थोड़ा रिस्क लेने वाले निवेशकों के लिए डिविडेंड देने वाले शेयर और म्यूचुअल फंड भी पैसिव इनकम का अच्छा विकल्प हो सकते हैं. इनमें समय-समय पर डिविडेंड मिलता है और पूंजी बढ़ने की संभावना भी रहती है, लेकिन बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना जरूरी है.
पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम
कम जोखिम के साथ हर महीने तय आमदनी चाहने वालों के लिए पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (MIS) भरोसेमंद ऑप्शन है. इसमें सिंगल अकाउंट में 9 लाख रुपये और जॉइंट अकाउंट में 15 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है. इस योजना में करीब 7.4 फीसदी ब्याज मिलता है, जो हर महीने खाते में आता है.
एन्युटी प्लान या पेंशन स्कीम
इसके अलावा, एन्युटी प्लान या पेंशन स्कीम भी रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का मजबूत सहारा बन सकती हैं. इसमें एकमुश्त निवेश के बदले जीवनभर हर महीने तय रकम मिलती रहती है.
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