अपने घर का सपना पूरा करने के लिए लिए गए भारी-भरकम लोन को चुकाने के लिए अक्सर लोग अपने ईपीएफ (EPF) बैलेंस का इस्तेमाल करने की सोचते हैं. नियम इसकी इजाजत तो देते हैं, लेकिन क्या यह आर्थिक रूप से समझदारी भरा फैसला है?
नियमों के मुताबिक, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ईपीएफ जमा से घर खरीदने या होम लोन चुकाने के लिए आंशिक निकासी की अनुमति देता है. इसके लिए आमतौर पर कर्मचारी को कम से कम 5 साल की ईपीएफ सदस्यता पूरी करनी होती है और प्रॉपर्टी उसके या उसके जीवनसाथी के नाम पर होनी चाहिए.
ईपीएफ जमा से पैसा निकालने के नियम
निकासी की भी एक सीमा है. कर्मचारी 36 महीने की बेसिक सैलरी + डीए, या कर्मचारी और नियोक्ता के कुल योगदान (ब्याज सहित) या जितना होम लोन बकाया है, इन तीनों में जो कम हो, उतनी रकम निकाल सकता है. यह पैसा एक तरह का नॉन-रिफंडेबल एडवांस होता है, यानी निकालने के बाद यह EPF में वापस नहीं जाता.
5 साल की नौकरी के बाद EPF निकासी टैक्स-फ्री
टैक्स के मामले में भी सावधानी जरूरी है. अगर कर्मचारी ने लगातार 5 साल की नौकरी पूरी कर ली है, तो EPF निकासी आमतौर पर टैक्स-फ्री होती है. लेकिन इससे पहले पैसा निकालने पर टैक्स और TDS लग सकता है.
ब्याज का गणित
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक EPF पर हर साल सरकार द्वारा तय ब्याज मिलता है और यह लंबे समय में कंपाउंडिंग से तेजी से बढ़ता है. अगर कोई व्यक्ति कम उम्र में EPF से बड़ी रकम निकाल लेता है, तो वह आने वाले 20–30 साल की संभावित ग्रोथ भी खो सकता है.
रिटायरमेंट के करीब हैं निकासी हो सकता है सही फैसला
हालांकि अगर कोई आदमी रिटायरमेंट के करीब है और लोन खत्म कर के कर्ज-मुक्त होना चाहता है, तो ऐसे में EPF का इस्तेमाल कुछ हद तक सही फैसला हो सकता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अगर EPF से पैसा निकालें तो EMI कम करने के बजाय लोन की टेन्योर कम करने में लगाएं, ताकि कुल ब्याज ज्यादा बच सके.
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