FIRE में सबसे अहम बात है फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस. यानी आपकी इन्वेस्टमेंट से इतना रिटर्न आने लगे कि महीने के खर्च के लिए सैलरी की जरूरत ही न रहे. पैसा बैंक अकाउंट में सोते हुए भी आपके लिए कमाई करता रहे. यही वजह है कि भारत में 30 से 40 साल के प्रोफेशनल्स के बीच FIRE तेजी से ट्रेंड बन रहा है.
FIRE नंबर क्या होता है और इसे कैसे निकालते हैं
FIRE की पूरी प्लानिंग एक नंबर पर टिकती है जिसे FIRE नंबर कहा जाता है. यह वह कुल रकम है जो आपको रिटायरमेंट के दिन चाहिए. आम फॉर्मूला है आपकी सालाना खर्च का 25 से 30 गुना.
अगर किसी का सालाना खर्च 12 लाख रुपये है तो FIRE नंबर करीब 3 से 3.6 करोड़ रुपये बनेगा. अगर खर्च 18 लाख है तो FIRE नंबर 4.5 से 5.4 करोड़ रुपये तक जाएगा. यह फॉर्मूला 4 प्रतिशत रूल पर आधारित है. मतलब हर साल कुल फंड का 4 प्रतिशत निकालने पर भी कैपिटल लंबी अवधि तक खत्म नहीं होता. भारत जैसे देश में जहां महंगाई थोड़ी ज्यादा रहती है वहां 3 से 3.5 प्रतिशत निकासी को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.
सेविंग रेट जितना बड़ा उतनी जल्दी रिटायरमेंट
FIRE जल्दी तभी संभव है जब सेविंग रेट हाई हो. सेविंग रेट का मतलब है सैलरी का कितना हिस्सा खर्च के बाद बचता है. अगर कोई व्यक्ति सैलरी का 50 से 70 प्रतिशत सेव कर पाता है तो 10 से 15 साल में FIRE नंबर हासिल हो सकता है. अगर सेविंग केवल 20 से 30 प्रतिशत है तो यही टारगेट 25 से 30 साल में पूरा होगा. भारत में जो लोग FIRE हासिल कर चुके हैं उनकी एवरेज सेविंग रेट 55 से 70 प्रतिशत के बीच देखी जाती है.
भारत में इन्वेस्टमेंट मिक्स कैसे बनता है.
FIRE के लिए सिर्फ सेविंग काफी नहीं होती. उस पैसे को सही जगह इन्वेस्ट करना जरूरी है. भारत में सबसे रियलिस्टिक मिक्स इक्विटी और सेफ इंस्ट्रूमेंट्स का बैलेंस है. इक्विटी म्यूचुअल फंड और ETF कोर ग्रोथ इंजन होते हैं. लंबी अवधि में 12 से 15 प्रतिशत तक रिटर्न संभव है. PPF, बॉन्ड और फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स सेफ्टी देते हैं. गोल्ड इन्फ्लेशन से बचाव का काम करता है. REITs और रेंटल प्रॉपर्टी पैसिव इनकम का सोर्स बन सकते हैं. सही बैलेंस से रिस्क भी कंट्रोल में रहता है और ग्रोथ भी मिलती है.
Lean FIRE और Fat FIRE का फर्क
हर व्यक्ति का FIRE एक जैसा नहीं होता. जो लोग सिंपल लाइफस्टाइल चाहते हैं उनके लिए Lean FIRE होता है. इसमें सालाना 8 से 12 लाख खर्च के साथ 2 से 3 करोड़ में रिटायरमेंट संभव है. जो लोग लग्जरी लाइफस्टाइल चाहते हैं उनके लिए Fat FIRE होता है. इसमें 20 से 40 लाख सालाना खर्च के लिए 5 से 10 करोड़ का फंड चाहिए. कुछ लोग बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए अलग फंड रखते हैं जिसे Bar FIRE कहा जाता है.
भारत में FIRE के रास्ते की बड़ी चुनौतियां
महंगाई भारत की सबसे बड़ी चुनौती है. अगर खर्च हर साल 6 से 8 प्रतिशत बढ़ता है तो FIRE नंबर भी बढ़ता जाता है. मेडिकल इमरजेंसी दूसरा बड़ा रिस्क है इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य है. बच्चों की पढ़ाई और शादी का खर्च भी बड़ी प्लानिंग मांगता है. मार्केट क्रैश भी एक रियल रिस्क है. इसलिए इमरजेंसी फंड और सेफ इन्वेस्टमेंट का बैलेंस जरूरी होता है. नौकरी छोड़ने के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है खर्च पर डिसिप्लिन बनाए रखना.
भारत में FIRE क्यों अब पहले से ज्यादा संभव है
आज इंडेक्स फंड, सस्ती SIP, ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म और फाइनेंशियल लिटरेसी ने FIRE को आसान बना दिया है. पहले जहां इन्वेस्टिंग केवल अमीर लोगों तक सीमित थी अब मिडल क्लास भी सही प्लानिंग से करोड़ों का फंड बना सकती है. FIRE का मतलब काम से भागना नहीं है. इसका मतलब है काम करने की मजबूरी से आजादी. जब पैसा आपके लिए काम करने लगे तो आप वही कर सकते हैं जो सच में करना चाहते हैं. सही सेविंग, स्मार्ट इन्वेस्टमेंट और खर्च कंट्रोल से भारत में 40 से 45 की उम्र में रिटायरमेंट अब सपना नहीं बल्कि एक achievable गोल बन चुका है.
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