अक्सर लोग इस बात में उलझ जाते हैं कि वे अपनी पॉलिसी की लिमिट (Sum Insured) बढ़ाएं या फिर एक ‘सुपर टॉप-अप’ प्लान लें. आइए समझते हैं कि आपकी जेब और सुरक्षा के लिए कौन सा ऑप्शन बेहतर है?
बेस हेल्थ पॉलिसी
बेस हेल्थ पॉलिसी वह मुख्य कवर है जो अस्पताल के बिलों को आपके सम इंश्योर्ड तक कवर करती है. इसमें कैशलेस ट्रीटमेंट, प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन, और नो-क्लेम बोनस जैसी सुविधाएं होती हैं. आमतौर पर लोग 3 से 5 लाख का कवर लेते हैं, लेकिन बढ़ती मेडिकल लागत को देखते हुए 10 लाख या उससे ज्यादा का कवर बेहतर माना जाता है.
सुपर टॉप-अप क्यों है ‘पैसा वसूल’ डील?
सबसे बड़ा फायदा इसकी कम कीमत है. अगर आप 25 लाख की एक अलग बेस पॉलिसी खरीदते हैं, तो वह महंगी पड़ेगी. लेकिन अगर आप अपनी 10 लाख की पॉलिसी के ऊपर 25 लाख का सुपर टॉप-अप लेते हैं, तो इसका प्रीमियम बेस पॉलिसी के मुकाबले करीब 40% तक सस्ता हो सकता है. मान लीजिए आपके पास 10 लाख की बेस पॉलिसी है और 10 लाख के ही ‘डिडक्टिबल’ वाला 25 लाख का सुपर टॉप-अप है. अगर अस्पताल का बिल 15 लाख आता है, तो पहले 10 लाख आपकी बेस पॉलिसी भरेगी और बाकी के 5 लाख आपका सुपर टॉप-अप प्लान देगा.
सही मिक्स चुनने की रणनीति
एक्सपर्ट के अनुसार सबसे पहले बेस हेल्थ पॉलिसी लें जो आपकी रोजमर्रा की हॉस्पिटलाइजेशन लागत को कवर करे. उसके बाद सुपर टॉप-अप जोड़ें ताकि गंभीर और महंगे मेडिकल इमरजेंसी में आपका खर्च कम हो. मेट्रो शहरों में बेस कवर कम से कम 5 लाख रुपये और छोटे शहरों में 3 लाख रुपये होना चाहिए.
दो पॉलिसियों के फायदे
बेस और सुपर टॉप-अप दोनों अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं. बेस कवर रोजमर्रा की जरूरतों को संभालता है, जबकि सुपर टॉप-अप बड़ी और अनपेक्षित खर्चों से बचाता है. दोनों का सही कॉम्बिनेशन आपको प्रीमियम बचाने के साथ सुरक्षा का भरोसा देता है.
एक्सपर्ट की सलाह
- दोनों पॉलिसी एक ही इंश्योरर से रखें ताकि क्लेम में कोई गैप न हो.
- रूम रेंट कैप्स, रिस्टोरेशन बेनिफिट और अनावश्यक बेबी/मैटरनिटी कवर से बचें.
- मेट्रो में उच्च बेस कवर चुनें ताकि आम हॉस्पिटलाइजेशन में कोई दिक्कत न हो.
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