ज्यादातर लोग सोचते हैं कि क्रेडिट कार्ड के ब्याज का रेट फिक्स्ड है और नहीं बदला जा सकता है. लेकिन सच ये है कि अगर आपका रिकॉर्ड अच्छा है तो आप बैंक से नेगोशिएट करके ब्याज कम करवा सकते हैं.
कब आपकी बात सुनता है बैंक
बैंक तभी झुकता है जब उसे लगता है कि ग्राहक खोने का रिस्क ज्यादा है. अगर आपका पेमेंट रिकॉर्ड साफ है, आप लंबे समय से उसी बैंक के ग्राहक हैं और आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो आपकी स्थिति मजबूत होती है. खास बात यह है कि सही समय पर की गई मांग ज्यादा असरदार होती है. लगातार 6-12 महीने समय पर भुगतान करने के बाद की गई रिक्वेस्ट पर बैंक ज्यादा गंभीरता से विचार करता है, जबकि हाल में हुई लेट पेमेंट के बाद की गई मांग अक्सर ठुकरा दी जाती है.
बातचीत कैसे करें ताकि असर पड़े
यह शिकायत करने की कॉल नहीं, बल्कि रिटेंशन बातचीत होती है. कस्टमर केयर से कहें कि आपको रिटेंशन या रिलेशनशिप टीम से जोड़ा जाए. साफ शब्दों में बताएं कि मौजूदा ब्याज दर आपके लिए महंगी है और आप दूसरे ऑप्शन पर विचार कर रहे हैं. अगर किसी दूसरे बैंक से कम दर का ऑफर मिला है, तो उसका जिक्र करना फायदेमंद हो सकता है. बातचीत में भावनाओं से ज्यादा आंकड़ों पर ध्यान दें.
बैंक क्या ऑप्शन दे सकता है
हर बार बैंक स्थायी रूप से ब्याज दर कम नहीं करता. कई बार वह कुछ महीनों के लिए कम दर की पेशकश करता है या कम ब्याज वाले कार्ड में बदलाव का विकल्प देता है. कुछ मामलों में बकाया रकम को EMI में बदलने या बैलेंस ट्रांसफर जैसी सुविधा भी दी जाती है, जिससे कुल ब्याज बोझ कम हो सकता है.
अगर जवाब ‘ना’ मिले तो क्या करें
अगर बैंक सीधा मना कर दे तो भी रास्ते बंद नहीं होते. आप मिनिमम अमाउंट से ज्यादा भुगतान कर ब्याज घटा सकते हैं. कम दर वाले कार्ड में बैलेंस ट्रांसफर या जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन लेकर महंगा कर्ज चुकाना भी एक रणनीति हो सकती है. समझदारी और अनुशासन से क्रेडिट कार्ड का भारी ब्याज काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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