यह ऑटो स्वीप फैसिलिटी उन लोगों के लिए एक सही विकल्प है जो बचत खाते में रखे पैसों को केवल सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि उन्हें बढ़ाना भी चाहते हैं. यह आपको बिना किसी झंझट के एफडी जैसा रिटर्न और सेविंग अकाउंट जैसी आजादी देता है. यह आपके सेविंग्स अकाउंट को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जोड़ देता है.
क्या है ऑटो स्वीप फैसिलिटी?
ऑटो स्वीप फैसिलिटी एक ऐसा बैंकिंग फीचर है जो आपके सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को आपस में जोड़ देता है. यह आपके खाते में एक लिमिट से ज्यादा पैसा होने पर उसे फिक्स्ड डिपॉजिट में बदल देता है. आसान भाषा में कहें तो आपको मैन्युअल रूप से FD बनाने की जरूरत नहीं पड़ती. बैंक का सिस्टम खुद तय करता है कि आपके खाते में कितने पैसे ‘सरप्लस’ यानी अतिरिक्त हैं और उन्हें ज्यादा ब्याज वाले खाते में ट्रांसफर कर देता है. जब भी आपके सेविंग अकाउंट में बैलेंस कम पड़ता है, तो एफडी से पैसा खुद-ब-खुद वापस सेविंग अकाउंट में आ जाता है.
यह काम कैसे करता है?
ऑटो स्वीप सुविधा को शुरू करते समय आपको बैंक को एक ‘थ्रेशहोल्ड अमाउंट’ यानी एक निश्चित सीमा बतानी होती है. मान लीजिए आपने तय किया कि आपके सेविंग अकाउंट में हमेशा ₹20,000 रहने चाहिए. अब यदि आपके खाते में ₹50,000 जमा होते हैं, तो बैंक सिस्टम ₹20,000 बचत खाते में छोड़कर बाकी के ₹30,000 की अपने-आप एक एफडी बना देगा.
अब आपको उन ₹30,000 पर बचत खाते के 3% ब्याज के बजाय एफडी वाला 6.5% या 7% ब्याज मिलने लगेगा. अब मान लो कि आपके बैंक अकाउंट का मिनिमम अमाउंट ही 20 हजार है और आपके पैसे निकालने के बाद राशि इससे कम हो जाती है तो बैंक अपने आप एफडी अकाउंट से पैसा बचत खाते में डालकर मिनिमम बैलेंस को पूरा कर देगा. इसी तरह मान लो कि आपको 25000 की जरूरत है तो अतिरिक्त 5 हजार रुपये आप बिना एफडी तुड़वाए एफडी अकाउंट से निकाल सकते हो.
ऑटो स्वीप फैसिलिटी के फायदे
इस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ लिक्विडिटी है. पारंपरिक एफडी में पैसा एक निश्चित समय के लिए लॉक हो जाता है. मैच्योरिटी से पहले निकालने पर ब्याज कम मिलता है और पेनल्टी लगती है. लेकिन ऑटो स्वीप में आपके पास पैसा खर्च करने की पूरी आजादी होती है और साथ ही उस पर रिटर्न भी बेहतर मिलता है. यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिनकी आय अनिश्चित है या जिन्हें अचानक पैसों की जरूरत पड़ती रहती है. इसके अलावा आपके खाते में जमा छोटी-छोटी अतिरिक्त राशि धीरे-धीरे एक बड़े कॉर्पस में बदल जाती है, जिस पर आपको ज्यादा ब्याज मिलता है.
कैसे एक्टिव करें यह सर्विस?
देश के कई बैंक ऑटो स्वीप फैसिलिटी उपलब्ध कराते हैं. हम आपको भारतीय स्टेट बैंक में नेट बैंकिंग के जरिए इसे एक्टिव करने का तरीका बताते हैं-
- सबसे पहले SBI की आधिकारिक इंटरनेट बैंकिंग साइट (onlinesbi.sbi) पर जाएं और अपने क्रेडेंशियल्स के साथ लॉगिन करें.
- होमपेज पर ‘Deposit & Investment’ टैब पर क्लिक करें और वहां ‘Deposit’ सेक्शन में जाएं.
- यहां आपको ‘Auto Sweep Facility’ का विकल्प दिखेगा, उस पर क्लिक करें.
- अपना वह खाता चुनें जिसे आप लिंक करना चाहते हैं और ‘Continue’ पर क्लिक करें.
- आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा, उसे दर्ज कर पुष्टि करें.
- अब आपको ‘थ्रेशहोल्ड अमाउंट’ और ‘रिजल्टेंट बैलेंस’ दर्ज करना होगा. साथ ही स्वीप साइकिल भी चुनें.
- एक बार सबमिट करने के बाद आपकी सर्विस एक्टिव हो जाएगी.
इन बातों का रखें ध्यान
यह सुविधा बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसके कुछ पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है. कुछ बैंक इस सुविधा के लिए मामूली सर्विस चार्ज ले सकते हैं. इसके अलावा, यदि आप स्वीप साइकिल (जैसे 30 दिन) पूरी होने से बहुत पहले ही पैसा ‘रिवर्स स्वीप’ कर लेते हैं, तो कुछ मामलों में उस हिस्से पर ब्याज दर थोड़ी कम हो सकती है.
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