अगर कोई आदमी वित्तीय वर्ष में 182 दिन से ज्यादा भारत से बाहर रहा है, तो उसे टैक्स नियमों के तहत NRI माना जाता है. ऐसे में वह ITR-1 फॉर्म फाइल करने का पात्र नहीं होता और उसे अपनी स्थिति के अनुसार दूसरा ITR फॉर्म चुनना पड़ता है.
इनकम टैक्स एक्ट के मुताबिक, किसी आदमी का रेजिडेंशियल स्टेटस उसकी भारत में फिजिकल स्टे के आधार पर तय किया जाता है. इसका सीधा मतलब है कि यह नहीं देखा जाता कि आप किस तरह के वीजा पर विदेश में हैं या वहां आपकी कमाई हो रही है या नहीं. अगर कोई आदमी पूरे वित्तीय वर्ष में भारत में 182 दिन से कम समय बिताता है, तो उसे एनआरआई माना जाता है.
ITR-1 फॉर्म केवल रेजिडेंट इंडिविजुअल्स के लिए ही मान्य
यहां सबसे अहम बात यह है कि ITR-1 फॉर्म केवल रेजिडेंट इंडिविजुअल्स के लिए ही मान्य है. इस फॉर्म के जरिए वही लोग रिटर्न फाइल कर सकते हैं, जो टैक्स नियमों के तहत रेज़िडेंट की श्रेणी में आते हैं और जिनकी आय सीमित स्रोतों जैसे सैलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी और अन्य साधारण स्रोतों से होती है.
ITR-1 फाइल करने के पात्र नहीं हैं NRI
इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप 182 दिन से ज्यादा विदेश में रहे हैं और उस वित्तीय वर्ष में आपका स्टेटस NRI बन गया है, तो आप ITR-1 फाइल करने के पात्र नहीं हैं. ऐसे मामलों में आपको अपनी आय, निवेश और स्थिति के अनुसार कोई अन्य उपयुक्त ITR फॉर्म, जैसे ITR-2 या ITR-3, चुनना होगा.
182 दिन से ज्यादा विदेश में रहने वालों के लिए ITR-1 का विकल्प नहीं
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर साल केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद ITR फॉर्म और उनसे जुड़े नियम नोटिफाई करता है. हालांकि, मौजूदा टैक्स नियमों के तहत यह साफ है कि 182 दिन से ज्यादा विदेश में रहने वाले आदमी के लिए ITR-1 का विकल्प उपलब्ध नहीं होता. इसलिए अगर आप विदेश में रह रहे हैं या हाल ही में NRI बने हैं, तो रिटर्न फाइल करने से पहले अपना रेजिडेंशियल स्टेटस और सही ITR फॉर्म जरूर जांच लें, ताकि बाद में किसी तरह की टैक्स परेशानी से बचा जा सके.
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प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन…और पढ़ें
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