बाजार में गिरावट से छोटे निवेशक घबरा गए हैं और SIP कैंसल करने की संख्या बढ़ रही है. सितंबर के हाई से भारतीय इक्विटी मार्केट में करीब 15% की करेक्शन आई है, जिससे रिटेल निवेशकों में डर बढ़ा है. हालांकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह गिरावट सामान्य है, क्योंकि पिछले चार साल में निफ्टी लगभग 80% चढ़ चुका था. उनका कहना है कि बाजार गिरने पर SIP रोकना बड़ी गलती हो सकती है, क्योंकि ऐसे समय में कम दाम पर ज्यादा यूनिट मिलते हैं जो लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकते हैं.
बिजनेस टूडे की रिपोर्ट के अनुसार, वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार ने इस बारे में अहम बातें कही हैं. धीरेंद्र कुमार का कहना है कि निवेशक ज्यादा रिएक्ट कर रहे हैं और यही ओवररिएक्शन बाजार की गिरावट से ज्यादा बड़ा खतरा है. पिछले चार सालों में निफ्टी ने करीब 80 प्रतिशत का मजबूत रैली दिया था. उसके बाद 15 प्रतिशत की गिरावट आना सामान्य बाजार की गणित है. लंबे समय तक निवेश करने का मतलब पांच साल या उससे ज्यादा होता है. एसआईपी के जरिए जब बाजार गिरता है तो नए यूनिट कम दाम पर मिलते हैं जो बाद में फायदा देते हैं.
एसआईपी कैंसल करने पर नुकसान
एक्सपर्ट बताते हैं कि एसआईपी कैंसल करने से निवेशक खुद को नुकसान पहुंचाते हैं. म्यूचुअल फंड के रिटर्न और निवेशकों के असल रिटर्न में 4 से 5 प्रतिशत का फर्क रहता है क्योंकि लोग रैली के बाद खरीदते हैं और गिरावट में बेचते हैं. 15 प्रतिशत डिस्काउंट पर बाजार मिल रहा है और लोग एसआईपी रोक रहे हैं तो यह असली समस्या है. धीरेंद्र कुमार के मुताबिक, बाजार ने 15 प्रतिशत छूट दी है और निवेशक अपना प्लान कैंसल कर रहे हैं.
लॉन्ग टर्म पर फोकस जरूरी
मंथली एसआईपी इनफ्लो अभी भी 30 हजार करोड़ रुपये से ऊपर है लेकिन कुछ महीनों में नए रजिस्ट्रेशन से ज्यादा कैंसलेशन हो रहे हैं. नए निवेशक जो पहले कभी बड़ी करेक्शन नहीं देखे हैं वे ज्यादा घबरा रहे हैं. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बाजार के इस चक्र में बने रहें. लंबे समय के लक्ष्य पर फोकस करें और एसआईपी जारी रखें. वोलेटिलिटी इक्विटी में सामान्य है जो कंपनी की कमाई के चक्र से जुड़ी होती है.
डाइवर्सिफिकेशन का रखें ध्यान
इसके अलावा डाइवर्सिफिकेशन भी बहुत जरूरी है. लार्ज कैप, मिड कैप, मल्टीकैप और हाइब्रिड फंड में पैसा बांटें ताकि उतार-चढ़ाव आसानी से झेल सकें. युवा निवेशक जो बीस की उम्र में हैं वे मल्टीकैप फंड चुन सकते हैं. करीब 40 साल के लोग एग्रेसिव हाइब्रिड फंड से इक्विटी ग्रोथ और डाउनसाइड प्रोटेक्शन पा सकते हैं. थीमेटिक या सेक्टर फंड से बचें क्योंकि वे मार्केटिंग प्रोडक्ट ज्यादा हैं और टाइमिंग मुश्किल होती है.
धीरेंद्र कुमार की सलाह है कि निवेश सिंपल रखें. एक अच्छा पोर्टफोलियो सिर्फ एक फंड से भी शुरू हो सकता है. हर महीने निवेश करें, हर महीने बचत करें और कोर्स पर बने रहें. निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क बाजार नहीं बल्कि उनकी खुद की रिएक्शन है. बाजार गिरावट में एसआईपी रोकना लंबे समय में कम रिटर्न देता है जबकि जारी रखने से कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है.
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यशस्वी यादव एक अनुभवी बिजनेस राइटर हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में दो साल का अनुभव है। ये नेटवर्क18 के साथ मनी सेक्शन में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत पर काम कर रही हैं। यशस्वी का फोकस बिजनेस और फाइनेंस से जुड़…और पढ़ें
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