लेकिन इस आसान दिखने वाले निवेश रास्ते के पीछे कई गलत धारणाएं भी छिपी हुई हैं, जो निवेशकों को गलत फैसले लेने पर मजबूर कर देती हैं. कुछ लोग इसे गारंटीड रिटर्न वाला प्रोडक्ट समझ लेते हैं, तो कुछ बाजार गिरते ही SIP बंद कर देते हैं. हकीकत यह है कि SIP जितना आसान दिखता है, उतना ही समझदारी और अनुशासन भी मांगता है, वरना उम्मीद और वास्तविक रिटर्न के बीच बड़ा गैप रह सकता है.
अमीरी का सपना और SIP का गलत मतलब
कई नए निवेशक मान लेते हैं कि SIP शुरू करते ही हर साल अच्छा और स्थिर रिटर्न मिलना तय है. सोशल मीडिया और कुछ फाइनेंशियल इन्फ्लुएंसर्स SIP को तेजी से अमीर बनने का शॉर्टकट बताकर पेश करते हैं. हकीकत यह है कि SIP कोई जादुई पैसा बनाने वाली मशीन नहीं है.
SIP का असली फायदा समय और अनुशासन में छिपा है. रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने समय तक निवेश किया, किस फंड में किया और बाजार का साइकल कैसा रहा. कमजोर फंड या गलत रणनीति में SIP करने से अच्छा रिटर्न नहीं मिलता. आमतौर पर ठोस ग्रोथ 7, 10 या 15 साल में दिखती है, न कि कुछ महीनों में.
ज्यादा फंड जोड़ने की निवेशकों की दौड़
कई निवेशक सोचते हैं कि जितने ज्यादा फंड होंगे, उतना ज्यादा मुनाफा होगा. इसी सोच के चलते वे 8 से 10 फंड में SIP शुरू कर देते हैं, जिनकी उन्हें खुद भी पूरी समझ नहीं होती. इससे पोर्टफोलियो बहुत जटिल हो जाता है और शेयरों में ओवरलैप बढ़ जाता है, जिससे असली डायवर्सिफिकेशन नहीं मिल पाता. बेहतर रणनीति यह है कि 3 से 5 अच्छे फंड चुने जाएं जैसे लार्ज कैप, फ्लेक्सी कैप, मिड कैप या हाइब्रिड. इन फंड्स को अपने वित्तीय लक्ष्यों जैसे बच्चों की शिक्षा, घर खरीदने या रिटायरमेंट से जोड़ा जाए.
SIP रोकने को लेकर निवेशकों का कन्फ्यूजन
कई निवेशक मानते हैं कि SIP बीच में रोकना या बंद करना गलत है और इससे पूरा निवेश खराब हो जाता है. लेकिन जीवन हमेशा एक जैसा नहीं रहता. इनकम घट सकती है, नौकरी बदल सकती है या लक्ष्य बदल सकते हैं.
SIP कोई कानूनी अनुबंध नहीं है. जरूरत पड़ने पर इसे रोका, बदला या बंद किया जा सकता है. कई फंड हाउस 3 से 6 महीने तक SIP पॉज करने का विकल्प भी देते हैं. अगर कोई फंड लगातार कमजोर प्रदर्शन कर रहा है, तो बेहतर फंड में स्विच करना समझदारी भरा फैसला हो सकता है.
गिरते बाजार में निवेशकों का डर
जब शेयर बाजार गिरता है और पोर्टफोलियो लाल दिखता है, तो कई निवेशक SIP बंद कर देते हैं. जबकि सच्चाई यह है कि गिरता बाजार SIP के लिए सबसे अच्छा समय होता है. जब NAV गिरता है, तो उसी रकम में ज्यादा यूनिट मिलती हैं. उदाहरण के लिए अगर NAV 100 रुपये है, तो 5000 रुपये निवेश करने पर 50 यूनिट मिलेंगी. लेकिन NAV 80 रुपये होने पर उतने ही पैसे में 62.5 यूनिट मिल जाएंगी. इससे औसत खरीद लागत कम होती है और बाजार ऊपर जाने पर रिटर्न बढ़ता है.
SIP को FD समझने की बड़ी गलतफहमी
कई लोग SIP को बैंक FD जैसा सुरक्षित निवेश मान लेते हैं, जहां रिटर्न लगभग तय होता है. यह सबसे बड़ी गलतफहमी है. SIP कोई निवेश प्रोडक्ट नहीं, बल्कि निवेश करने का तरीका है. असल रिटर्न उस म्यूचुअल फंड पर निर्भर करता है जिसमें पैसा लगाया गया है. फंड का पोर्टफोलियो, फंड मैनेजर की रणनीति और जोखिम स्तर रिटर्न तय करते हैं. इसलिए SIP शुरू करने से पहले फंड की पूरी जांच करना निवेशक की जिम्मेदारी है.
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