पिछले पांच साल में, इस शहर ने इतनी तेज रफ्तार पकड़ी है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज प्राइस ग्रोथ और खरीदारों के इरादों में साफ बदलाव ने नोएडा को एक अलग लीग में पहुंचा दिया है. जो एक प्लान्ड सैटेलाइट टाउन के तौर पर शुरू हुआ था, वह अब लग्जरी और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स के लिए पहले से मौजूद मार्केट्स के साथ सीधा मुकाबला कर रहा है.
कीमतों में दिख रहा साफ असर
यह बदलाव प्राइसिंग ट्रेंड्स में साफ दिख रहा है. एनारोक की रिपोर्ट के अनुसार पहली तिमाही 2020 और पहली तिमाही 2025 के बीच, नोएडा में घरों की औसत कीमतें 4,795 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर लगभग 9,200 प्रति वर्ग फुट हो गईं, जो 92 फीसदी की बढ़ोतरी है. एक कदम और आगे बढ़ते हुए, ग्रेटर नोएडा में इसी समय में 98 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. जबकि कुल NCR का औसत 81 फीसदी था, गुरुग्राम में कीमतों में 84 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई. असल में, ये कोई टेम्पररी छोटे डेवलपमेंट नहीं हैं, ये घर खरीदने वालों और डेवलपर्स दोनों के बीच बढ़ते भरोसे और लगातार मांग को दिखाते हैं.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है माइलस्टोन
यह बदलाव इस इलाके में मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ की वजह से भी हो रहा है. पूर्वी एनसीआर के डेवलपमेंट पैटर्न में जेवर में बनने वाले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बड़ा बदलाव होने वाला है जिसके जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है. एक बार चालू होने के बाद, यह ग्लोबल एक्सेस को बेहतर करेगा और यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को और भी मजबूत करेगा.
मार्केट के अनुमान बताते हैं कि एयरपोर्ट से होने वाली एक्टिविटी बढ़ने के साथ इस हिस्से में प्रॉपर्टी की कीमतों में 20-30 फीसदी की और बढ़ोतरी हो सकती है. पिछले 5 साल में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे एक फलते-फूलते ऑफिस और रेजिडेंशियल बेल्ट के रूप में मैच्योर हो गया है. आज यमुना एक्सप्रेसवे से नोएडा के बीच की बेल्ट में जबर्दस्त बूम भी देखने को मिला है. 2022 से NCR की लगभग 40 फीसदी ग्रेड-A ऑफिस लीजिंग यहीं हुई है, जिससे हजारों प्रोफेशनल्स इस माइक्रो-मार्केट के करीब आ रहे हैं.
मिड से प्रीमियम की ओर बढ़ रहा नोएडा
हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर कहते हैं कि नोएडा की रियल एस्टेट कहानी एक अहम नए दौर में आ गई है, जिसने खरीदारों और निवेशकों के एनसीआर मार्केट को देखने के नजरिए को बदल दिया है. जिसे कभी एक सस्ता विकल्प माना जाता था, वह अब एक मजबूत ग्रोथ हब बन गया है, जिसे बदलाव लाने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर, आसान एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, बढ़ते मेट्रो नेटवर्क और आने वाले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से बढ़ावा मिल रहा है, जो एक बड़ा कारण है. मिड और प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट दोनों में लगातार डिमांड देख रहे हैं, जिसे बढ़ती उम्मीदों और लंबे समय में वैल्यू बनाने में बढ़ते भरोसे से सपोर्ट मिल रहा है. स्ट्रेटेजिक पोजिशनिंग, बढ़ते एंड-यूजर और निवेशकों की दिलचस्पी के साथ, नोएडा अब एक उभरता हुआ मार्केट नहीं रहा, यह NCR का अगला रियल एस्टेट पावरहाउस बन गया है.’
रियल टाइम में बदल रहा है मार्केट
वही स्मार्टवर्ल्ड डेवलपर्स के प्रेसिडेंट सेल्स एंड मार्केटिंग, आशीष जेरथ कहते हैं कि हर रियल एस्टेट मार्केट का एक अहम मोड़ होता है, और नोएडा का मोड़ अभी आ रहा है. इसकी ग्रोथ की राह खास तौर पर एंड-यूजर पर आधारित है, जिसे मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर होते आर्थिक मौकों और बढ़ते लाइफस्टाइल स्टैंडर्ड का सपोर्ट मिला है. यह इलाका किफायती होने से आगे बढ़कर एक प्रीमियम रियल एस्टेट डेस्टिनेशन बन रहा है. नोएडा को न सिर्फ साउथ दिल्ली और ईस्ट दिल्ली दोनों से अपग्रेड के तौर पर रेजिडेंशियल खरीदारों के चुनने से फायदा होता है, बल्कि एक्सप्रेसवे के जरिए तेज कनेक्टिविटी के साथ, पूरे उत्तर प्रदेश के खरीदार नोएडा को अपने एनसीआर घर और इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखते हैं. असली मौका भविष्य के लिए तैयार शहरी वर्ग की उम्मीदों से मेल खाने वाली एस्पिरेशनल लिविंग देने में है. मार्केट इंतजार नहीं कर रहा है, यह रियल टाइम में बदल रहा है, और डेवलपर्स भी.
सेक्टर 150 बन रहा हब
प्रीमियम हाउसिंग लगातार तेजी से बढ़ रही है. सेक्टर 150 ने चुपचाप खुली जगहों और कम आबादी वाले रहने के लिए अपनी पहचान बनाई है, जिससे दिल्ली और गुरुग्राम के खरीदार आकर्षित हो रहे हैं जो टॉप-टियर कीमतों पर ज्यादा खर्च किए बिना बड़े घर चाहते हैं. यहां, फोकस सिर्फ स्क्वायर फुटेज से कहीं ज्यादा है. लोग फैसला लेने से पहले क्लबहाउस की क्वालिटी, स्पोर्ट्स फैसिलिटी और इको-फ्रेंडली फीचर्स पर पूरा ध्यान दे रहे हैं.
नोएडा का विकास इसकी स्ट्रक्चर्ड प्लानिंग से भी हुआ है. गुरुग्राम के ज्यादातर प्राइवेट-लेड एक्सपेंशन के उलट, नोएडा ने ज्यादा रेगुलेटेड और ग्रिड-बेस्ड अप्रोच अपनाया. सेक्टर प्लानिंग, चौड़ी सड़कों और बेहतर सिविक सिस्टम ने एक मजबूत नींव बनाई है. मेट्रो एक्सटेंशन और बेहतर कनेक्टिविटी ने रोजाना आने-जाने को आसान बना दिया है. जैसे-जैसे एक्सप्रेसवे के किनारे ऑफिस स्पेस बढ़े, घरों की डिमांड भी अपने आप बढ़ रही है.
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