अभी दिल्ली से वाराणसी रूट पर सबसे तेज चलने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस कुल आठ घंटे का समय लेती है. लेकिन हाई स्पीड कॉरिडोर पर चलने वाली ट्रेन आधे से कम समय केवल तीन घंटे 50 मिनट में आपको वाराणसी पहुंचा देगी. यान आप दिल्ली से सवार होंगे,कैटरिंग स्टाफ आपको चाय नाश्ता देगा और आप इसे खत्म करते करते कानपुर पहुंच जाएंगे. इस तरह आपका पूरा सफर फ्लाइट से कम समय में पूरा हो सकेगा.
कितने होंगे स्टापेज
भारतीय रेलवे के अनुसार हाई स्पीड ट्रेन के स्टापेज वंदेभारत की तुलना में ज्याद हो सकते हैं. चूंकि इसका ट्रैक अलग होगा, इस वजह से वंदेभारत से कम समय में पहुंचा सकेगी.मौजूदा समय वंदेभारत दिल्ली के बाद कानपुर और प्रयागराज में रुककर वाराणसी पहुंचती है. हाई स्पीड ट्रेन का इन स्टेशनों के अलावा अलीगढ़ में स्टापेज दिया जा सकता है. जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को इस ट्रेन से सफर का आनंद उठा सकें.
प्रयागराज का कितने घंटे का सफर
रेलवे के अनुसार दिल्ली से प्रयागराज तक की दूरी पूरी करने में तीन घंटे का समय लगेगा, जबकि वंदेभारत छह घंटे के करीब समय लगाती है. इस तरह हाई स्पीड ट्रेन केवल आधे समय में प्रयागराज पहुंचा देगी. हालांकि बाद में पूरा कॉरिडोर दिल्ली से सिलीगुड़ी तक बनेगा. जिसमें करीब 1600 किमी. की दूरी केवल सात घंटे में पूरी कर सकेंगे. क्योंकि दिल्ली से वाराणसी 865 किमी. तीन घंटे 50 मिनट और वाराणसी से सिलीगुड़ी 720 किमी. दो घंटे 55 मिनट में सफर पूरा होगा.
ये है सात हाई स्पीड कॉरिडोर
मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी तथा वाराणसी से सिलीगुड़ी. दक्षिण भारत में हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई को जोड़ने वाला त्रिकोण आईटी, विनिर्माण और व्यापारिक केंद्रों को मजबूत बनाएगा, जबकि उत्तर-पूर्व में दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी मार्ग पूर्वी भारत और उत्तर-पूर्वी राज्यों को नई गति देगा. यात्रा समय में होने वाली कमी से यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा.
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