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भारतीय रेलवे के नए आर.ओ.बी. से काशी विश्वनाथ और विंध्याचल के बीच दूरी कम हो गई है, जिससे श्रद्धालुओं को सफर में समय और जाम से राहत मिलेगी. सड़क सुरक्षा भी बढ़ी है.
तय समय से चार महीने बनेगा आरओबी.
कच्छवा रोड स्टेशन यार्ड में समपार संख्या 20 ‘स्पेशल’ पर बना आर.ओ.बी. चार महीने पहले ही पूरा हो गया. इससे वाराणसी से मिर्जापुर (लगभग 62-65 किमी), चुनार (40-42 किमी) और विंध्याचल (मिर्जापुर से 9 किमी आगे) के लिए नई और तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध हो गई है. पहले यहां लेवल क्रॉसिंग पर ट्रेन आने-जाने से गेट बंद होने पर 30 मिनट या उससे ज्यादा जाम लग जाता था. अब रोड रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरती हैं. वाराणसी से मिर्जापुर का सफर अब 1.5 से 2 घंटे की बजाय सवा घंटे का हो जाएगा.
विशेष रूप से मां विंध्यवासिनी मंदिर (विंध्याचल धाम) जाने वाले श्रद्धालुओं को फायदा होगा. नवरात्रि, होली और अन्य त्योहारों में लाखों लोग यहां आते हैं, जहां पहले जाम से परेशानी होती थी. दूसरा आर.ओ.बी. कादीपुर और सारनाथ स्टेशनों के बीच क्रांसिंग संख्या 12 पर बनाया गया है. इसमें 60 मीटर लंबा बो-स्ट्रिंग गर्डर पूर्वोत्तर रेलवे ने बनाया, जबकि दोनों तरफ एप्रोच रोड उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम लिमिटेड (यूपीएसबीसीएल) ने तैयार किया.
इससे चौबेपुर और बाबतपुर क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हुई है. ये आर.ओ.बी. वाराणसी-मिर्जापुर सेक्शन (NH-35) पर हैं और एनएचएआई के ईपीसी मोड से बने हैं. लागत करीब 36-37 करोड़ रुपये बताई गई है. इनसे सड़क सुरक्षा बढ़ी है, लेवल क्रॉसिंग दुर्घटनाएं खत्म हुई हैं, पर्यटन को बढ़ावा मिला है. रेल मंत्रालय का कहना है कि क्रासिंग को चरणबद्ध तरीके से आर.ओ.बी./आर.यू.बी. में बदलकर बदला जा रहा है. काशी विश्वनाथ से विंध्याचल का सफर अब पहले से ज्यादा आसान और कम समय वाला हो गया है.
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