वंदेभारत, शताब्दी राजधानी समेत प्रीमियम ट्रेनों में टिकट के साथ बुकिंग का विकल्प होता है, इन ट्रेनों में पेंट्री कार नहीं होती है. आईआरसीटीसी के बेस किचन से खाना पहुंचाया जाता है. वहीं, कई ट्रेनों में पेंट्री कार होती है. जिससे खाना आर्डर करने पर यात्रियों को सर्व किया जाता है. वहीं कई ट्रेनें ऐसी हैं, जिसमें पेंट्री कार नहीं होती है. लंबी दूरी की ऐसी ट्रेनों में यात्रा करने वाले लोगों को खाने पीने को लेकर परेशानी होती है. आईआरसीटीसी ने पिछले दिनों ऐसी मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए ‘ई पेंट्री मील बुकिंग’ सर्विस शुरू की है. इसका फायदा भी दिख रहा है. यात्री खाना बुक कर रहे हैं.
ई पेंट्री सर्विस पर एक नजर
ई -पेंट्री सेवा से यात्री अपनी पसंद का भोजन पहले से ही ऑनलाइन बुक कर सकते हैं. भोजन ट्रेन में उनकी सीट पर ही डिलीवर किया जाता है, जिससे यात्रा आरामदायक हो जाती है. यह सर्विस अप्रैल 2025 में शुरू हुई थी. सबसे पहले इसे विवेक एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 22503-04) में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया. ट्रायल सफल होने के बाद 25 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में यह सर्विस और शुरू की गयी.
अब तक कितने मील हुए बुक
आईआरसीटीसी के अनुसार शुरू होने के बाद से अब तक 65,000 से ज्यादा मील बुक हो चुके हैं. इनमें सभी 25 ट्रेनें शामिल हैं.
सबसे ज्यादा क्या हुआ आर्डर
इनमें ब्रेकफास्ट और डिनर के लिए 17,000 से अधिक बुकिंग हुई है. वहीं मॉर्निंग और इवनिंग टी के लिए 8,000 से ज्यादा बुकिंग हुई है. जबकि सबसे ज्यादा लंच बुक किया गया है. आंकड़ों के अनुसार 15,000 से अधिक ऑर्डर किए गए हैं.
सबसे ज्यादा ऑर्डर किस ट्रेन में
आईआरसीटीसी के अनुसार अब तक सबसे ज्यादा आर्डर निजामुद्दीन बेंगलुरू संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में बुक किए गए हैं. जिनकी संख्या करीब 8,300 रहीं है. यात्रियों को इसका खाना अधिक पंसद आया है. वहीं सबसे ज्यादा मील दिसंबर 2025 में सबसे 16,500 बुक किए गए.
कैसे करते हैं बुक
यात्री आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट www.irctc.co.in पर टिकट बुकिंग के समय ई -पेंट्री विकल्प चुन सकते हैं. यह सुविधा कंफर्म, आरएसी या वेटिंग लिस्ट वाले टिकट वालों के लिए भी खुली है. बुकिंग के बाद एसएमएस या ईमेल से कंफर्मेशन और मील वेरिफिकेशन कोड (एमवीसी) मिलता है. यात्रा के दिन यात्री यह कोड डिलीवरी करने वाले को दिखाते हैं और भोजन सीट पर मिल जाता है. भुगतान पूरी तरह डिजिटल तरीके से होता है, नकद की कोई जरूरत नहीं. एमवीसी सिस्टम से यह पक्का होता है कि भोजन सही यात्री को ही दिया जाए.
कब खाने का रिफंड मिलता है
सभी ऑर्डर डिजिटल डैशबोर्ड से ट्रैक किए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहती है. अगर मील नहीं मिलता तो पूरा रिफंड मिल जाता है और इसकी जानकारी एसएमएस या ईमेल से दी जाती है. आईआरसीटीसी की यह पहल यात्रा को और आसान बना रही है.
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