दुनिया के 31 देशों में औसतन 43% लोग कहते हैं कि बिना कार के जीना उनके लिए असंभव है। 22 देशों में लोग कार को पसंदीदा ट्रांसपोर्ट मानते हैं। 65% अमेरिकी बिना कार लिए नहीं रह सकते हैं। लेकिन भारत के लोगों की पहली पसंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट है। देश के 62% लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट को चुनना चाहते हैं। इप्सॉस की ग्लोबल मोबिलिटी रिपोर्ट 2026 में यह खुलासा हुआ है। लेकिन ईवी के सबसे बड़े पैरोकार रहे फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों का इससे मोहभंग हो रहा है। जापान में यह आंकड़ा -28% तक गिर चुका है। इसके विपरीत इंडोनेशिया (60%), मेक्सिको (60%) और चिली (57%) सबसे आगे हैं। यह सर्वे 31 देशों में किया गया। 23,722 लोगों ने हिस्सा लिया। सेल्फ-ड्राइविंग कार – भारत डरता नहीं – भारत में ईवी अपील 40% है, जो ग्लोबल औसत 47% से थोड़ा कम है। लेकिन यह यूरोप और नॉर्थ अमेरिका से बेहतर स्थिति में है। – 36% लोग सेल्फ-ड्राइविंग कार को असुरक्षित मानते हैं। सबसे आगे फ्रांस (-37%), नीदरलैंड्स (-35%), अमेरिका (-25%) है। – भारत में करीब 47% लोग इस तकनीक में सुरक्षित महसूस करते हैं, जबकि ग्लोबल औसत 36% है। भारतीय बाजार में हर कंपनी के लिए बड़े मौके भारत में 16% किसी टेक कंपनी से कार खरीदना पसंद करेंगे, 22% की पसंद पारंपरिक ऑटोमेकर हैं। – 62% को कोई प्राथमिकता नहीं है। यानी बाजार किसी के लिए बंद नहीं है। टाटा, महिंद्रा से लेकर गूगल, शाओमी जैसी टेक कंपनियों के लिए दरवाजे खुले हैं। एशिया में चीन विरोध बढ़ रहा, भारत के लिए बड़े मौके – जापान में 90% लोग चीनी कार नहीं लेंगे। दक्षिण कोरिया में भी चीन-विरोधी भावना प्रबल है। – कनाडा में 48% लोग अमेरिकी कार नहीं खरीदेंगे। यानी इस माहौल में भारत के लिए बड़े मौके भी हैं। – चीन के खिलाफ यह अविश्वास भारतीय ब्रांड्स के लिए एशियाई बाजारों में रास्ता खोल सकता है। – 42% लोग किसी न किसी खास देश की कार खरीदने से बच रहे हैं। इस लिस्ट में चीनी सबसे ऊपर है। उसका बॉयकॉट रेट (41%) और अमेरिकी कारों के लिए यह आंकड़ा करीब 24% है।
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