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RRTS Namo Bharat Maximum punctuality- कोहरे में ट्रेन या फ्लाइट सभी बेहाल रहते हैं. फ्लाइट रद्द की जाती हैं तो ट्रेनें समय पर नहीं चल पाती हैं. इस वजह से यात्री परेशान होते हैं. इसके बावजूद एक श्रेणी की ट्रेन सभी मौसम में करीब-करीब समय पर चलती है. ये है आरआरटीएस नमोभारत ट्रेन, जो 99 फीसदी समय पर चल रही है.
सबसे अलग हैं ये ट्रेनें.
देश में वंदे भारत, मेट्रो के अलावा एक और श्रेणी की ट्रेन है, जो देश की पहली रीजनल ट्रेन नमो भारत है.जो साल 2023 में शुरू हुई है. इसके बाद से अब तक लगभग 99% समय पर चल रही हैं. यानी पंच्युअलिटी रेट करीब करीब 100 फीसदी के आसपास का है. यह सेवा सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक चलती है और हर 15 मिनट में ट्रेन मिलती है. शुरू होने से अब तक 2 करोड़ से ज्यादा यात्रियों ने इसका इस्तेमाल किया है.
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में घना कोहरा, सर्दी और बारिश के बावजूद नमो भारत ट्रेनें समय पर चलती रहीं. कोहरे के कारण सड़क पर जाम, दुर्घटनाएं और सामान्य ट्रेनों में देरी हुई, कई उड़ानें रद्द हुईं , लेकिन नमो भारत ने अपनी पंच्यूअलिटी बनाए रखी.
क्यों है पंच्यूअल
अधिकारी ने कहा कि खराब मौसम में भी ट्रेनें बिना रुके अपनी यात्रा पूरी करती हैं. ट्रेनों की सुरक्षा और पंच्युअलिटी सुनिश्चित करने के लिए रात भर काम होता है. रात 11 बजे के बाद दैनिक परिचालन बंद होने पर गाजियाबाद के दुहाई डिपो में रखरखाव और जांच शुरू हो जाती है. सुबह 4 बजे से टेस्ट ट्रेनें चलाई जाती हैं ताकि सिस्टम पूरी तरह तैयार हो.
कौन सा सिस्टम हुआ यूज
एनसीआरटीसी के अनुसार नमो भारत का ऑपरेशन एक केंद्रीय नियंत्रण केंद्र से होता है. इसमें ईटीसीएस लेवल-2 सिग्नलिंग का इस्तेमाल किया गया है, जो दुनिया में पहली बार किसी रैपिड ट्रांजिट सिस्टम में लगा है. इससे खराब मौसम में भी सुरक्षित और निर्बाध परिचालन होता है.
भारतीय रेल कितनी पंक्चुअलिटी
मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की औसत पंक्चुअलिटी अप्रैल-अक्टूबर 2025-26 में लगभग 80% रही है. यह 2024-25 के 77.12% के मुकाबले सुधार हुआ है. दिसंबर 2025 में एक सप्ताह (8-14 दिसंबर) के दौरान पंक्चुअलिटी 80% रही, जिसमें 22 डिवीजन 90% से ज्यादा और 10 डिवीजन 95% से ज्यादा समय पर चलीं. इस तरह ट्रेनों के पंच्युअलिटी पर भी सुधार हो रहा है. 70 डिवीजन में 90% से ज्यादा पंक्चुअलिटी है, जो यूरोप के कई देशों से बेहतर है.
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