FII Selling : पूरी दुनिया में आईटी स्टॉक्स की शामत इन दिनों आई हुई है. भारतीय शेयर भी भी इससे अछूते नहीं है. अब तो विदेशी निवेशकों ने भी सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी है. फरवरी में एफआईआई ने करीब 17000 करोड़ रुपये मूल्य के आईटी स्टॉक्स बेच डाले.
आईटी इंडेक्स (Nifty IT) में फरवरी के दौरान करीब 20.8% की गिरावट आई.
आईटी शेयरों से बाहर निकलने का सिलसिला फरवरी के पहले दिन से ही शुरू हो गया था. फरवरी के पहले पखवाड़े में एफआईआई ने लगभग 11,000 करोड़ रुपये के आईटी शेयर बेचे. दूसरे पखवाड़े में करीब 6,000 करोड़ रुपये की बिकवाली विदेशी निवेशकों ने की. खास बात यह है कि एक तरफ विदेशी निवेशक आईटी सेक्टर को छोड़ रहे थे, वहीं दूसरी तरफ वे भारतीय बाजार के प्रति कुल मिलाकर सकारात्मक बने रहे. उन्होंने पूरे महीने में अन्य सेक्टरों में करीब 15,250 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की.
दिग्गज कंपनियों के शेयर ‘लहूलुहान’
आईटी इंडेक्स (Nifty IT) में फरवरी के दौरान करीब 20.8% की गिरावट आई. व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो नुकसान का मंजर और भी डरावना है. टेक महिंद्रा का शेयर फरवरी में 23.5% की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा टूटा.परसिस्ट्स सिस्टम्स शेयर में 23 फीसदी की गिरावट आई. इन्फोसिस 20.4% तो एचसीएल टेक 20.1% लुढ़क गया. टीसीएस में 18% तो विप्रो 17.4% गिर गया.
4 साल के निचले स्तर पर पहुंचा निवेश मूल्य
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़े बताते हैं कि इस बिकवाली के बाद आईटी सेक्टर में एफआईआई के निवेश की वैल्यू गिरकर 4.18 लाख करोड़ रुपये रह गई है. यह पिछले चार वर्षों का सबसे निचला स्तर है. जनवरी 2026 के अंत में यह आंकड़ा 5.34 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें मात्र एक महीने में 21.8% की भारी गिरावट आई है. अगर साल 2025 की शुरुआत से तुलना करें, जब निवेश 7.3 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर था, तो अब तक निवेशकों की संपत्ति में लगभग 42.8% की सेंध लग चुकी है.
क्यों आईटी शेयरों से पीछा छुड़ा रहे हैं एफआईआई
इस भगदड़ के पीछे सबसे बड़ी वजह ‘जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (Generative AI) को लेकर बढ़ती चिंता है. निवेशकों के बीच यह डर घर कर गया है कि एआई में हो रही क्रांतिकारी प्रगति मानव-आधारित कोडिंग और पारंपरिक आईटी सपोर्ट सेवाओं की जरूरत को खत्म कर सकती है. गौरतलब है कि भारत की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियां अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं सेवाओं से हासिल करती हैं. बाजार को लगता है कि अगर एआई ने इन कार्यों की जगह ले ली, तो भारतीय आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल को गहरा धक्का लग सकता है.
आईटी से निकाला पैसा इन सेक्टरों में लगाया
भले ही आईटी शेयरों से एफआईआई ने तौबा कर ली हो, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के अन्य हिस्सों पर उनका भरोसा कायम है. फरवरी के दूसरे पखवाड़े में उन्होंने आईटी, कंज्यूमर सर्विसेज (5,238 करोड़) और टेलीकॉम (1,775 करोड़) से पैसा निकालकर कैपिटल गुड्स (4,103 करोड़), ऑटो (3,075 करोड़) और कंस्ट्रक्शन (2,742 करोड़) जैसे सेक्टरों में जमकर निवेश किया. फाइनेंशियल सर्विसेज और पावर सेक्टर में भी विदेशी निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी.
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