आज के दिन ट्यूब इंवेस्टमेंट्स ऑफ इंडिया निफ्टी ऑटो इंडेक्स का टॉप लूजर शेयर रहा, जो करीब 2% गिरकर 2,367 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा एक्साइड इंडस्ट्रीज, युनो मिन्डा, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) और टीवीएस मोटर कंपनी के शेयर भी 1% से अधिक गिरावट के साथ लाल निशान में थे. टाटा मोटर्स (पैसेंजर व्हीकल्स) और हीरो मोटोकोर्प के शेयर लगभग 1% नीचे थे, जबकि अशोक लेलैंड और ईचर मोटर्स में मामूली नुकसान देखने को मिला. हालांकि, कुछ कंपनियों ने बाजार के इस दबाव के बावजूद हरा निशान बनाए रखा. इनमें सोना BLW प्रिसिजन फोर्जिंग्स, बॉश, बजाज ऑटो, भारत फोर्ज और समवर्धना मोटरसन्स इंटरनेशनल शामिल हैं, जो मामूली बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे.
क्या आपको ऑटो स्टॉक्स में निवेश करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की गिरावट मुनाफावसूली और मांग को लेकर सतर्कता के कारण हुई है, न कि सेक्टर की बुनियादी मजबूती में कोई समस्या होने की वजह से. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सिद्धार्थ मौर्य, फाउंडर और MD, Vibhavangal Anukulakara कहते हैं कि ऑटो शेयरों में हाल की गिरावट शॉर्ट टर्म प्रॉफिट बुकिंग और मांग की चिंताओं का परिणाम है. इसके अलावा हर्षल दासानी, बिजनेस हेड, INVasset PMS, का कहना है कि यह गिरावट सेक्टर के बेसिक आंकड़ों में गिरावट नहीं दिखाती. उन्होंने कहा कि पिछले साल ऑटो शेयरों ने मजबूत रिटर्न दिए हैं और इस कारण कुछ नजदीकी प्रॉफिटबुकिंग होना स्वाभाविक था.
निफ्टी ऑटो इंडेक्स मार्च 2025 के निचले स्तर 19,300 से लगभग 40% बढ़कर 27,555 पर पहुंच चुका है, जो दिखाता है कि बाजार में बहुत सारी उम्मीदें पहले से ही शामिल हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, हाल की गिरावट मूल्यांकन संतुलन (valuation rationalisation) का हिस्सा है, मांग में गिरावट का संकेत नहीं है.
आगे क्या होगी स्टॉक्स की चाल?
विशेषज्ञों का कहना है कि मांग में सुधार, आर्थिक स्थिरता और स्पष्ट नीतियां ऑटो शेयरों को स्थिर करने में मदद कर सकती हैं. हालांकि, जब तक उपभोक्ता मांग या सेक्टर-स्पेसिफिक कैटालिस्ट स्पष्ट नहीं होते, तब तक वोलेटिलिटी और रेंज-बाउंड मूवमेंट जारी रह सकता है. हर्षल दासानी ने बताया कि संभावित जीएसटी रेशनलाइजेशन, ब्याज दर में कटौती और आयकर राहत से वाहनों की मांग बढ़ सकती है. कम वित्तपोषण लागत से विशेष रूप से पैसेंजर व्हीकल्स और टू-व्हीलर्स में बिक्री बढ़ सकती है. इसके अलावा, सरकार की निर्माण, EV अपनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस लंबी अवधि में वॉल्यूम ग्रोथ का समर्थन करता है.
क्या ट्रंप का 500% टैरिफ का असर ऑटो शेयरों पर हो रहा?
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत से अमेरिका को सीधे ऑटो एक्सपोर्ट सीमित होने के कारण इस टैरिफ का प्रभाव प्रमुख ऑटो निर्माताओं पर नहीं पड़ेगा. केवल कुछ ऑटो एंसीलरी कंपनियों पर असर पड़ने की संभावना है जो वैश्विक OEMs को घटक सप्लाई करती हैं.
निवेशकों के लिए अवसर
दासानी के अनुसार, हाल की गिरावट निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित करने का अवसर देती है. तुषार बडजाते, डायरेक्टर, बडजाते स्टॉक & शेयर, कहते हैं कि अब आगे की ग्रोथ चयनात्मक होगी—मजबूत प्रोडक्ट पाइपलाइन, निर्यात की स्पष्टता और बढ़ती EV पैठ रखने वाले OEMs इसके लाभार्थी रहेंगे. विश्नु कांत उपाध्याय, AVP-Research, Master Capital Services, ने कहा कि लंबी अवधि में सेक्टर के मूलभूत आंकड़े मजबूत हैं, और वर्तमान गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर प्रदान करती है. निवेशकों को सेक्टर लीडर्स और EV में मजबूत एक्सपोजर वाले शेयरों को प्राथमिकता देनी चाहिए.
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