6 जनवरी 2026 तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉपर की कीमत करीब 13,000 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई. बिजनेस टूडे की रिपोर्ट्स के अनुसार, सप्लाई और डिमांड के बीच बढ़ता अंतर आगे भी कीमतों को सपोर्ट दे सकता है. भारत में भी कॉपर की तेजी कम नहीं रही. MCX पर 2025 में कॉपर के दाम करीब 50% चढ़े, जो 796 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 1,197 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए. भले ही सोना और चांदी ने ज्यादा एब्सोल्यूट रिटर्न दिया हो, लेकिन कॉपर ने निफ्टी 100, निफ्टी मिडकैप 150 और निफ्टी स्मॉलकैप 250 जैसे बड़े शेयर इंडेक्स को भी पीछे छोड़ दिया. इस मजबूत परफॉर्मेंस के बाद निवेशक अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या कॉपर को भी सोना और चांदी की तरह पोर्टफोलियो में जगह मिलनी चाहिए, और इसे कैसे पोर्टफोलियो में शामिल करें? ये आपको बताते हैं.
निवेशकों की नजर कॉपर पर क्यों है?
कॉपर आज की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम मेटल बन चुका है. इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, पावर ग्रिड, इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स में बड़े पैमाने पर होता है. जैसे-जैसे दुनिया इलेक्ट्रिफिकेशन और डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे कॉपर की लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है. निवेशकों के लिए कॉपर एक ऐसा ऑप्शन है जो इक्विटी और बॉन्ड से अलग पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन देता है और एक बड़े स्ट्रक्चरल ग्रोथ ट्रेंड से जुड़ने का मौका भी.
भारत में कॉपर में निवेश कैसे करें?
इस रिपोर्ट के अनुसार, JM Financial Services ने बताया है कि मौजूदा मार्केट साइकिल में कॉपर से जुड़े निवेश आकर्षक नजर आते हैं. हालांकि, भारत में अभी ऐसा कोई घरेलू ETF नहीं है जो सीधे फिजिकल कॉपर की कीमत को ट्रैक करे, लेकिन इसके बावजूद निवेश के कुछ रास्ते मौजूद हैं.
1. इंटरनेशनल ETFs
भारतीय निवेशक RBI की Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत विदेशों में निवेश की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म्स के जरिए ग्लोबल कॉपर ETFs में पैसा लगा सकते हैं. इसमें United States Copper Index Fund (CPER), Global X Copper Miners ETF (COPX) जैसे विकल्प शामिल हैं.
2. म्यूचुअल फंड FoF (Fund of Funds)
कुछ भारतीय म्यूचुअल फंड ऐसे FoF स्कीम्स ऑफर करते हैं, जो विदेशों में लिस्टेड कॉपर ETFs में निवेश करते हैं. यह उन निवेशकों के लिए आसान रास्ता है जो इंटरनेशनल ट्रेडिंग अकाउंट नहीं खोलना चाहते.
कॉपर ETFs के प्रकार
प्राइस-बेस्ड ETFs: जो कॉपर फ्यूचर्स को ट्रैक करते हैं और सीधे कीमतों के उतार-चढ़ाव से जुड़े होते हैं.
माइनिंग ETFs: जो दुनिया की बड़ी कॉपर माइनिंग कंपनियों में निवेश करते हैं. इसमें कीमतों के साथ-साथ कंपनियों के परफॉर्मेंस का फायदा मिलता है.
ETF FoFs: भारतीय म्यूचुअल फंड जो विदेशी कॉपर ETFs में निवेश करते हैं. इसके अलावा माइनिंग कैटेगरी में Global X Copper Miners ETF (COPX) सबसे बड़े फंड्स में से एक है, जिसमें करीब 40 ग्लोबल माइनिंग कंपनियों का एक्सपोजर है. वहीं iShares Copper and Metals Mining ETF (ICOP) कम एक्सपेंस रेशियो के साथ BHP, Anglo American और Grupo Mexico जैसी कंपनियों में निवेश करता है.
कितना निवेश करना सही रहेगा?
विशेषज्ञ मानते हैं कि कॉपर ETFs को कोर नहीं बल्कि सैटेलाइट निवेश के तौर पर देखना चाहिए. कंज़र्वेटिव निवेशक 5–7% निवेश कर सकते हैं मॉडरेट निवेशक 7–10% का निवेश कर सकते हैं और एग्रेसिव निवेशक मार्केट साइकिल के हिसाब से टैक्टिकल एक्सपोजर के मुताबिक निवेश कर सकते हैं. रिटर्न देखकर इतना तो साफ है कि 2025 की शानदार तेजी के बाद कॉपर अब सिर्फ एक इंडस्ट्रियल मेटल नहीं रह गया है, बल्कि निवेशकों के लिए एक उभरता हुआ एसेट क्लास बनता जा रहा है.
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