FII Investment : भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी एक बार फिर बढ़ने लगी है. एक्सचेंज से जारी आंकड़ों को देखा जाए तो पता चलता है कि फरवरी में अब तक 9 सत्रों की ट्रेडिंग में विदेशी संस्थागत निवेश शुद्ध खरीदार बने हुए हैं. यही वजह है कि बाजार में तेजी भी दिख रही है. पिछले 9 सत्र में 2 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश विदेशी निवेशकों से आया है. विश्लेषकों का कहना है कि ट्रेड डील के बाद विदेशी निवेशकों का भरोसा एक बार फिर बढ़ने लगा है.
विदेशी निवेशकों ने बाजार में 9 सत्रों में 2 अरब डॉलर निवेश किए हैं.
एक्सचेंज से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 9 फरवरी को भी विदेशी निवेशकों ने अस्थायी रूप से 2,223 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी सक्रिय रहे और उन्होंने इसी अवधि में 8,973 करोड़ रुपये से ज्यादा की इक्विटी खरीदी. Nifty50 में DIIs की हिस्सेदारी FIIs से ज्यादा होना भारत के शेयर बाजारों में घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी की ओर एक बड़ा बदलाव दिखाता है.
क्यों दिख रहा यह बदलाव
यह घरेलू पूंजी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. विश्लेषकों के मुताबिक, यह बदलाव लगातार म्यूचुअल फंड SIP इनफ्लो, खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और बीमा व पेंशन फंड्स की स्थिर निवेश नीति के कारण आया है, जबकि FIIs ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ऊंची विदेशी ब्याज दरों और मजबूत डॉलर के चलते सतर्क रुख अपनाया है. घरेलू धन का बढ़ता दबदबा एक अधिक स्थिर और दीर्घकालिक तरलता का स्रोत प्रदान करता है. अस्थिर विदेशी निवेश पर निर्भरता को कम करता है और वैश्विक जोखिम के समय बाजारों को सहारा देने में मदद कर सकता है. इससे भारत के इक्विटी बाजार की संरचना और अधिक मजबूत होगी और यह घरेलू विकास की बुनियाद के साथ बेहतर तालमेल में आएगी.
भारत-अमेरिका समझौते से बनी बात
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए बनाए गए फ्रेमवर्क ने अनिश्चितताओं को कम किया, बॉन्ड यील्ड को स्थिर किया और जोखिम लेने की प्रवृत्ति को बढ़ाया. इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा भारतीय बाजार पर ज्यादा बढ़ा. बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में रैली के दौरान 3 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली, जबकि बीएसई मिडकैप 150 और बीएसई स्मॉलकैप 250 में क्रमशः 5.66 फीसदी और 6.3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.
आरबीआई ने भी बढ़ाया भरोसा
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की नरम नीति, जीडीपी में सुधार, मजबूत कमाई की संभावना और घरेलू निवेश का लगातार प्रवाह भारतीय बाजारों को सपोर्ट कर रहा है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित हो सकता है. मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तिमाही तक घरेलू संस्थाओं के पास निफ्टी 50 का करीब 24.8 फीसदी हिस्सा था, जो विदेशी निवेशकों के 24.3 फीसदी हिस्से से थोड़ा ज्यादा है. विश्लेषकों का कहना है कि एफआईआई की हिस्सेदारी विदेशी निवेश के मामले में आठ तिमाही के निचले स्तर पर है और घरेलू पूंजी आधार लगातार मजबूत हो रहा है. यह बदलाव संरचनात्मक है, न कि चक्रीय.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.