एचडीएफसी बैंक की एसेट क्वालिटी इस तिमाही में स्थिर रही. 31 दिसंबर 2025 तक ग्रॉस नॉन‑परफॉर्मिंग एसेट्स (GNPA) 35,179 करोड़ रुपये पर थे, जो पिछले साल 36,019 करोड़ रुपये थे. ग्रॉस NPA रेशियो 1.42% से घटकर 1.24% हो गया. नेट NPA भी घटकर 11,982 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल 11,588 करोड़ रुपये था. इसके साथ ही नेट NPA रेशियो 0.46% से घटकर 0.42% हो गया.
ऑपरेटिंग खर्च हुआ इतना
एचडीएफसी बैंक के इस तिमाही के ऑपरेटिंग खर्च 18,770 करोड़ रुपये रहे. नए लेबर कोड के तहत कर्मचारी लाभों का अनुमानित 800 करोड़ रुपये का असर निकाल दें, तो खर्च 17,970 करोड़ रुपये थे, जो पिछले साल के 17,110 करोड़ रुपये से ज्यादा है. बैंक का कोर कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो इस तिमाही में 39.2% रहा.
प्रावधान और आकस्मिक खर्च (Provisions & Contingencies) 2,840 करोड़ रुपये रहे, जो पिछले साल की तुलना में 10% से ज्यादा कम हैं. इसमें 1,040 करोड़ रुपये की आकस्मिक प्रावधान रिलीज भी शामिल है, जो मुख्य रूप से एक बड़े उधारकर्ता समूह की शर्तों के पूरा होने से हुई. इस रिलीज को हटाकर देखें तो कुल क्रेडिट कॉस्ट रेशियो दिसंबर तिमाही में 0.55% रहा.
शेयर्स पर रहेगी नजर
तीमाही नतीजों के सामने आने से पहले, HDFC बैंक के शेयर 0.55% बढ़कर NSE पर 930.55 रुपये पर बंद हुए थे. पिछले एक साल में शेयर ने 13.7% की बढ़त दर्ज की है, जो निफ्टी 50 के 11% से बेहतर परफॉर्मेंस है. निवेशकों के लिए सबसे अहम फैक्टर मैनेजमेंट का आउटलुक होगा. LDR को घटाने की रणनीति, लोन ग्रोथ और नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दिया गया मार्गदर्शन शेयर के लिए दिशा तय कर सकता है. इसके अलावा बाजार की नजर कृषि लोन से जुड़ी किसी भी स्लिपेज और एग्री पोर्टफोलियो की एसेट क्वालिटी पर मैनेजमेंट की टिप्पणी पर रहेगी. बैंक का मार्केट कैप 7.12 लाख करोड़ रुपये है और पिछले एक साल में शेयर ने करीब 12.65 फीसदी रिटर्न दिया है. अब सोमवार को इस बैंक के शेयर्स में हलचल देखने को मिल सकती है.
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