एआई से सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को होने वाले संभावित नुकसान की आशंका से आज आईटी शेयरों में जोरदार गिरावट आई. इस डर के माहौल में एचएसबीसी और जेपी मॉर्गन ने कहा है कि एआई से सॉफ्टवेयर कंपनियों को नुकसान नहीं होगा और यह मानना पूरी तरह “तर्कहीन” है कि एआई सॉफ्टवेयर की जगह ले लेगा.
ब्रोकरेज के अनुसार, एआई सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए खतरा नहीं बल्कि एक ‘स्मार्ट एजेंट’ के रूप में काम करेगा.
HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च ने आईटी क्षेत्र में चल रही ‘डर की लहर’ को गलत मानते हुए कहा है कि यह मानना पूरी तरह “तर्कहीन” है कि एआई सॉफ्टवेयर की जगह ले लेगा. HSBC के विशेषज्ञों का तर्क है कि सॉफ्टवेयर एक ‘एग्जीक्यूशन मशीन’, जबकि एआई एक ‘लर्निंग एल्गोरिद्म’ है. जब ये दोनों मिलते हैं, तो सॉफ्टवेयर की ताकत कई गुना बढ़ जाती है. ब्रोकरेज के अनुसार, एआई सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए खतरा नहीं बल्कि एक ‘स्मार्ट एजेंट’ के रूप में काम करेगा. इससे सॉफ्टवेयर कंपनियों का कुल संभावित बाजार (TAM) घटने के बजाय और अधिक विस्तार करेगा.
आईटी कंपनियां बनेंगेी टेक दुनिया की प्लंबर
जेपी मॉर्गन (JP Morgan) ने TCS और इंफोसिस जैसी भारतीय कंपनियों का बचाव करते हुए एक बहुत ही दिलचस्प उपमा दी है. उन्होंने आईटी कंपनियों को “टेक दुनिया का प्लंबर” बताया है. उनका तर्क है कि भले ही एंथ्रोपिक का ‘क्लॉड’ (Claude) जैसा एआई मॉडल मिनटों में हजारों लाइन का कोड लिख दे, लेकिन उस कोड को किसी कंपनी के पुराने सिस्टम और जटिल कॉर्पोरेट ढांचे के साथ जोड़ना (Integration) अभी भी एक मानवीय प्रक्रिया है.
जेपी मॉर्गन के अनुसार, एआई अक्सर “एआई स्लॉप” (AI Slop) यानी ऐसा कोड तैयार करता है जो दिखने में सही होता है लेकिन बड़े उद्यमों की सुरक्षा और स्थिरता के मानकों पर खरा नहीं उतरता. यहीं पर आईटी सर्विस कंपनियों की भूमिका ‘प्लंबर’ जैसी हो जाती है, जो लीकेज को ठीक करती हैं और सिस्टम को सुचारू बनाती हैं.
ट्राइबल कॉन्टेक्स्ट है असली ताकत
इन दोनों बैंकों का मानना है कि मौजूदा सॉफ्टवेयर और आईटी दिग्गज कंपनियों के पास कुछ ऐसा है जो एआई के पास कभी नहीं हो सकता. वह है ‘ट्राइबल कॉन्टेक्स्ट’. इसका अर्थ है किसी कंपनी की आंतरिक संस्कृति, उसकी विशेष कार्यप्रणाली और दशकों पुराने सिस्टम की पेचीदगियों को समझने का अनुभव.
टीसीएस और इंफोसिस जैसी कंपनियों ने दशकों तक वैश्विक ग्राहकों का भरोसा जीता है. एआई किसी कंपनी के ‘इमोशनल और कल्चरल कॉन्टेक्स्ट’ को नहीं समझ सकता. स्थापित कंपनियों के पास पहले से ही मजबूत सेल्स नेटवर्क और ग्राहकों के साथ गहरे संबंध हैं, जिन्हें रातों-रात किसी एआई टूल से रिप्लेस करना लगभग नामुमकिन है.
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