शेयर बाजार में आईपीओ के जरिए कम समय में मुनाफा कमाने की चाहत रखने वाले निवेशकों के लिए जीएमपी, रजिस्ट्रार और बीआरएलएम जैसे शब्दों को समझना अनिवार्य है. जीएमपी जहां लिस्टिंग का एक अनौपचारिक अनुमान प्रदान करता है, वहीं रजिस्ट्रार और बुक रनिंग लीड मैनेजर पूरी प्रक्रिया को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से सफल बनाने का जिम्मा उठाते हैं. इन तीनों की कार्यप्रणाली को गहराई से समझकर ही निवेशक जोखिम को कम और मुनाफे की संभावना को बढ़ा सकते हैं.
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आईपीओ आवेदन से लेकर शेयरों की लिस्टिंग तक की प्रक्रिया कई चरणों से होकर गुजरती है. इसमें अनौपचारिक बाजार के संकेतों से लेकर सेबी द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं की कानूनी भूमिकाएं शामिल होती हैं. इन बारीकियों की जानकारी न होना न केवल आपके निवेश को जोखिम में डाल सकता है, बल्कि गलत उम्मीदों के कारण वित्तीय नुकसान का कारण भी बन सकता है.
क्या होता है जीएमपी
आईपीओ चर्चाओं में सबसे ज्यादा सुना जाने वाला शब्द जीएमपी होता है. यह एक तरह का अनौपचारिक बाजार है जहाँ कंपनी के शेयर शेयर बाजार में लिस्ट होने से पहले ही खरीदे और बेचे जाते हैं. अगर किसी शेयर का भाव 500 रुपये तय किया गया है और ग्रे मार्केट में उसका जीएमपी 150 रुपये चल रहा है, तो निवेशक उम्मीद करते हैं कि वह शेयर 650 रुपये पर लिस्ट होगा. ध्यान देने वाली बात यह है कि जीएमपी को सेबी की मान्यता प्राप्त नहीं होती और यह केवल मांग और आपूर्ति पर आधारित एक अनुमान मात्र होता है. कई बार ऊंचे जीएमपी वाले शेयर भी बाजार की खराब स्थिति के कारण नीचे लिस्ट हो सकते हैं.
रजिस्ट्रार क्या होता है?
रजिस्ट्रार वह कड़ी है जो निवेशकों और कंपनी के बीच प्रशासनिक कार्यों को संभालती है. जब आप आईपीओ के लिए आवेदन करते हैं, तो उस आवेदन को प्रोसेस करने और डेटा को मैनेज करने का काम रजिस्ट्रार का ही होता है. शेयरों का अलॉटमेंट करना, जिन लोगों को शेयर नहीं मिले उनके पैसे रिफंड करना और अलॉट हुए शेयरों को डीमैट खाते में जमा करना इसकी मुख्य जिम्मेदारी होती है. रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित करता है कि पूरी अलॉटमेंट प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमों के दायरे में रहकर पूरी की जाए. भारत में केफिन टेक और लिंक इनटाइम जैसे नाम इस क्षेत्र में काफी सक्रिय भूमिका निभाते हैं.
बुक रनिंग लीड मैनेजर आखिर क्या करते हैं
किसी भी आईपीओ का मुख्य सूत्रधार बुक रनिंग लीड मैनेजर यानी बीआरएलएम होता है. यह आमतौर पर बड़े मर्चेंट बैंक होते हैं जिन्हें कंपनी अपना आईपीओ मैनेज करने के लिए नियुक्त करती है. आईपीओ का प्राइस बैंड क्या होगा, इश्यू का साइज कितना बड़ा रखना है और बड़े संस्थागत निवेशकों को कैसे आकर्षित करना है, यह सब बीआरएलएम ही तय करते हैं. ये कंपनियां सेबी के साथ तालमेल बिठाने से लेकर आईपीओ की मार्केटिंग और रोड शो आयोजित करने तक का सारा जिम्मा संभालती हैं. आसान शब्दों में कहें तो आईपीओ को बाजार में उतारने से लेकर उसकी सफल लिस्टिंग तक की पूरी प्लानिंग इन्हीं के हाथ में होती है.
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
सिर्फ जीएमपी के आंकड़ों को देखकर किसी भी आईपीओ में पैसा लगाना खतरनाक हो सकता है. जानकारों का मानना है कि निवेशकों को कंपनी के बिजनेस मॉडल, उसकी बैलेंस शीट और भविष्य की संभावनाओं को गहराई से परखना चाहिए. किसी भी आईपीओ की असली सेहत उसके रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी आरएचपी में छिपी होती है जो सेबी की वेबसाइट पर उपलब्ध रहता है. हमेशा आधिकारिक स्रोतों और ठोस आंकड़ों के आधार पर ही निवेश का फैसला लेना समझदारी भरा कदम होता है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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