एलआईसी का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बनी चिंताओं के कारण आईटी शेयरों की कीमतें आकर्षक स्तर पर आ गई हैं, इसलिए यह निवेश बढ़ाने का सही समय हो सकता है. एलआईसी की इस खरीदारी से आईटी सेक्टर में उसका निवेश सिर्फ तीन महीनों में 1.82 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.17 लाख करोड़ रुपये हो गया. उसके कुल पोर्टफोलियो में आईटी सेक्टर की हिस्सेदारी 11.32% से बढ़कर 12.43% हो गई, जबकि इस दौरान कई आईटी शेयर अपने ऊपरी स्तर से करीब 30% तक गिर चुके थे.
किस वजह से एलआईसी ने लिया ये फैसला?
एलआईसी का यह कदम बाजार की आम सोच से अलग है. बाजार में डर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत के आउटसोर्सिंग मॉडल को लंबे समय में प्रभावित कर सकता है, जिससे आईटी शेयरों में लगातार बिकवाली हो रही है. जहां एक तरफ एलआईसी आईटी शेयर खरीद रही थी, वहीं दूसरी तरफ उसने वित्तीय सेवाओं के शेयरों में बड़ी बिकवाली की. एलआईसी ने State Bank of India (SBI) के लगभग 3,080 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो उसकी सबसे बड़ी बिक्री रही. इसके अलावा HDFC Bank में 1,528 करोड़ रुपये और Bank of Baroda में 1,173 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
इन सेक्टर्स से एलआईसी ने बनाई दूरी
एलआईसी के पोर्टफोलियो में फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर की हिस्सेदारी 27.21% से घटकर 26.52% रह गई, हालांकि दिसंबर तक इस सेक्टर में कुल निवेश 4.64 लाख करोड़ रुपये था और यह अभी भी सबसे बड़ा सेक्टर बना हुआ है. एलआईसी ने इंडस्ट्रियल और एनर्जी सेक्टर में भी सतर्कता दिखाई. उसने Larsen & Toubro (L&T) में 2,442 करोड़ रुपये और Reliance Industries में 2,367 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी कम की. मेटल सेक्टर में भी बड़ी बिकवाली हुई. Hindalco Industries में 2,307 करोड़ रुपये और Vedanta Limited में 1,491 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. साथ ही Steel Authority of India Limited (SAIL) में एलआईसी की हिस्सेदारी 10% से घटकर 9.18% हो गई.
सबसे बड़ा बदलाव Coforge में देखने को मिला. सितंबर में जहां एलआईसी की हिस्सेदारी 1% से भी कम थी, वहीं दिसंबर तिमाही में यह बढ़कर 4.66% हो गई. यह उसके पूरे पोर्टफोलियो में सबसे तेज बढ़ोतरी में से एक है. मिडकैप आईटी कंपनी Coforge अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर से 30% से ज्यादा गिर चुकी है. एलआईसी ने कई अन्य कंपनियों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, जिनमें NMDC, Voltas, Dr. Reddy’s Laboratories, Astral Limited, Indian Overseas Bank, Exide Industries और JSW Energy शामिल हैं.
वहीं दूसरी ओर, कुछ कंपनियों में एलआईसी ने हिस्सेदारी घटाई. Adani Ports में उसकी हिस्सेदारी 7.73% से घटकर 6.79% रह गई. Hindalco Industries में 6.18% से घटकर 4.92% और Vedanta Limited में 5.7% से घटकर 4.97% हो गई. Bank of Baroda में भी हिस्सेदारी 6.64% से घटकर 5.84% रह गई.
फार्मा शेयर्स पर भरोसा कायम
आईटी के अलावा, एलआईसी ने Sun Pharmaceutical Industries में 2,942 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो टीसीएस के बाद उसकी दूसरी सबसे बड़ी खरीद रही. इसके साथ ही Bajaj Auto और Coal India में भी अच्छी-खासी खरीदारी की. इससे संकेत मिलता है कि एलआईसी को चुनिंदा सरकारी कंपनियों और घरेलू मांग से जुड़ी कंपनियों पर भरोसा है.
बिक्री की लिस्ट में Maruti Suzuki भी शामिल रही, जिसमें 1,147 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए. इस तिमाही में एलआईसी ने NSE में लिस्टेड 73 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई, जबकि 90 कंपनियों में हिस्सेदारी घटाई. जिन कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाई गई, उनके शेयरों में औसतन सिर्फ 0.14% की बढ़त हुई, जिससे लगता है कि एलआईसी लंबी अवधि की रणनीति पर काम कर रही है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या AI का असर भारतीय आईटी सेक्टर पर अस्थायी दबाव है या फिर यह लंबे समय के लिए बड़ा बदलाव साबित होगा.
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