BSE का मार्केट कैप 2014-15 में करीब 101 लाख करोड़ रुपये था जो अक्टूबर 2025 तक बढ़कर लगभग 470 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसी तरह म्यूचुअल फंड का AUM 2015 में 12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर 2025 में करीब 79 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. बाजार इतना बड़ा हो गया है लेकिन आम परिवारों की भागीदारी अभी भी बहुत कम है.
पुराने निवेश ऑप्शन तक ही सीमित हैं निवेशक
सर्वे में पता चला कि लोगों की जानकारी ज्यादातर आसान और पुराने निवेश ऑप्शन तक ही सीमित है. करीब 53 फीसदी लोग म्यूचुअल फंड या ETF के बारे में जानते हैं जबकि 49 फीसदी को शेयर बाजार की जानकारी है. लेकिन असल में निवेश करने वाले बहुत कम हैं. सिर्फ 6.7 फीसदी परिवार म्यूचुअल फंड या ETF में पैसा लगाते हैं और केवल 5.3 फीसदी परिवार सीधे शेयरों में निवेश करते हैं.
अन्य निवेशक प्रोडक्ट्स जैसे कॉरपोरेट बॉन्ड, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O), REITs, InvITs और AIF के बारे में जागरूकता और भी कम है. हालांकि 13 फीसदी लोग F&O का नाम जानते हैं लेकिन इनमें निवेश करने वाले परिवार 1 फीसदी से भी कम हैं. ये दिखाता है कि लोग आसान चीजों तक ही पहुंच रहे हैं और जटिल प्रोडक्ट्स से दूर रहते हैं.
अलग-अलग शहरों में निवेश
सर्वे में शहर और गांव के बीच बड़ा फर्क दिखा. शहरी इलाकों में 74 फीसदी परिवार किसी न किसी निवेश प्रोडक्ट को जानते हैं जबकि ग्रामीण इलाकों में ये आंकड़ा 56 फीसदी है. निवेश की भागीदारी सबसे ज्यादा दिल्ली में 21 फीसदी, महाराष्ट्र में 17 फीसदी, गोवा में 16 फीसदी और गुजरात में 15 फीसदी है. वहीं नागालैंड में सिर्फ 3 फीसदी, उत्तराखंड और मेघालय में 4.5 फीसदी जैसे राज्यों में बहुत कम है.
सबसे ज्यादा निवेशक हैं Gen Z
युवा वर्ग निवेश को लेकर ज्यादा जागरूक है. Gen Z में 66 फीसदी, मिलेनियल्स में 62 फीसदी जबकि Gen X और उससे ऊपर के लोगों में 56 फीसदी जागरूक हैं. ये अच्छा संकेत है कि आने वाली पीढ़ी ज्यादा एक्टिव हो सकती है. जो लोग निवेश नहीं करते उनकी सबसे बड़ी वजहें है जानकारी की कमी और जटिलता , जो 74 फीसदी लोगों ने बताई गई है. बाजार के उतार-चढ़ाव से नुकसान का डर भी बहुत है. 51 फीसदी लोगों में भरोसे की कमी है यानी वित्तीय संस्थानों और प्रोडक्ट्स पर विश्वास नहीं बन पाता.
SEBI का कहना है कि जो बड़ी आबादी अभी निवेश से दूर है वो आगे चलकर फाइनेंशियल इन्क्लूजन बढ़ाने और देश की आर्थिक ग्रोथ को नई दिशा देने का बड़ा मौका है. सर्वे से पता चलता है कि जागरूकता बढ़ी जरूर है लेकिन भागीदारी अभी कम है. अगर शिक्षा, आसान प्लेटफॉर्म और भरोसा बढ़ाया जाए तो ज्यादा परिवार बाजार से जुड़ सकते हैं. ये सर्वे निवेश की दुनिया में एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट है जो बताता है कि अभी बहुत काम बाकी है.
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