7 हफ्तों में कितनी बड़ी गिरावट आई
बीते करीब सात हफ्तों में सेंसेक्स अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से लगभग 3,800 अंक टूट चुका है, जो 4.4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट को दर्शाता है. वहीं निफ्टी 50 भी अपने लाइफटाइम हाई 26,373 के मुकाबले करीब 1,100 अंक नीचे आ चुका है. 20 जनवरी को सेंसेक्स 1,066 अंक गिरकर 82,180 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 353 अंक फिसलकर 25,232 पर आ गया. यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब बाजार पहले ही ऊंचे वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा था.
गिरावट में SIP की असली ताकत
बाजार में कमजोरी के दौर में SIP निवेशकों को सबसे ज्यादा घबराहट होती है, लेकिन जानकार इसे SIP की असली परीक्षा मानते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब बाजार नीचे होता है, तब SIP के जरिए कम दामों पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं. इसे रुपये की औसत लागत यानी कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है. लंबे समय में यही रणनीति रिटर्न और कंपाउंडिंग को बेहतर बनाती है. इसलिए गिरावट के समय SIP रोकने के बजाय जारी रखना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.
परफेक्ट एंट्री का इंतजार करना नुकसानदेह
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक ऑलटाइम हाई के बाद करेक्शन आना निवेश चक्र का सामान्य हिस्सा है. अल्पकालिक उतार-चढ़ाव भले ही असहज लगे, लेकिन लंबे समय के निवेशकों को परफेक्ट एंट्री पॉइंट खोजने की कोशिश से बचना चाहिए. अक्सर ऐसा देखा गया है कि स्थिरता का इंतजार करते-करते निवेशक अच्छे मौके गंवा देते हैं. SIP का फायदा यही है कि यह निवेश को अनुशासन में रखता है और भावनात्मक फैसलों से बचाता है.
मौजूदा SIP को बंद न करने की सलाह
मार्केट जानकारों का साफ कहना है कि मौजूदा SIP को किसी भी हाल में बंद नहीं करना चाहिए. उनका मानना है कि बाजार अभी केवल 3–4 प्रतिशत ही अपने शिखर से नीचे है, इसे बड़ी गिरावट नहीं कहा जा सकता. ऐसे समय में SIP जारी रखना समझदारी है. जिन निवेशकों के पास क्षमता है, वे SIP को धीरे-धीरे बढ़ाने यानी स्टेप-अप करने पर भी विचार कर सकते हैं. आने वाले समय में बजट जैसे बड़े इवेंट के कारण बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जो SIP निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
लंपसम निवेश के लिए क्या रणनीति अपनाएं
अगर किसी निवेशक के पास एकमुश्त रकम है, तो उसे एक साथ बाजार में लगाने के बजाय चरणों में निवेश करना बेहतर माना जा रहा है. विशेषज्ञों की सलाह है कि रकम को तीन या चार हिस्सों में बांटकर हर हफ्ते या कुछ अंतराल पर निवेश किया जाए. इससे एंट्री लेवल संतुलित रहता है और जोखिम भी कम होता है. लंबी अवधि के लिहाज से भारतीय बाजार का आउटलुक अब भी सकारात्मक माना जा रहा है और मैक्रो इकॉनमिक संकेतक समर्थन में हैं.
सही एसेट और मार्केट कैप बैलेंस जरूरी
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि SIP निवेश के साथ-साथ पोर्टफोलियो का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. इक्विटी हिस्से में करीब 50–55 प्रतिशत निवेश लार्ज कैप फंड्स में, 20–25 प्रतिशत मिड कैप में और बाकी स्मॉल कैप में रखने की सलाह दी जाती है. यह संतुलन जोखिम और रिटर्न दोनों को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करता है. बिना सही एलोकेशन के SIP का पूरा फायदा नहीं मिल पाता.
गिरावट को मौका समझने की जरूरत
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया गिरावट को घबराने का संकेत नहीं, बल्कि समझदारी से निवेश बढ़ाने का अवसर माना जाना चाहिए. परफेक्ट बॉटम का इंतजार करने के बजाय SIP को जारी रखना और जरूरत पड़ने पर उसमें हल्की बढ़ोतरी करना ज्यादा कारगर रणनीति है. इतिहास गवाह है कि जो निवेशक गिरावट के दौर में अनुशासन बनाए रखते हैं, वही लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न हासिल कर पाते हैं.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.