Jehanabad Success Story: जहां एक ओर धान की पराली (पुआल) जलाना प्रदूषण और सजा का सबब बन चुका है. वहीं जहानाबाद के टेहटा गांव के राजीव और सुनीता ने इसी ‘वेस्ट’ को ‘बेस्ट’ बिजनेस में बदल दिया है. यह दंपति पराली से महापुरुषों के जीवंत चित्र उकेरकर न केवल पर्यावरण बचा रहे हैं, बल्कि लाखों में कमाई भी कर रहे हैं. उनकी इस बेजोड़ कलाकारी के लिए उन्हें राजकीय पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है. ताने सुन शुरू किया सफर, आज मिली पहचान राजीव बताते हैं कि इस हुनर की शुरुआत 2002 में झारखंड प्रवास के दौरान हुई. शुरुआती दिनों में समाज ने उन्हें ‘पागल’ तक कहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आज वे पराली से 11 फीट तक की विशाल कलाकृतियां बनाते हैं. एक चित्र को तैयार करने में एक महीने तक की कड़ी मेहनत लगती है, लेकिन इसका आर्थिक और सामाजिक प्रतिफल शानदार है. नीतीश कुमार भी कर चुके हैं सराहना इनकी कलाकारी की चमक मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच चुकी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद इनकी सराहना कर चुके हैं. प्रदूषण कम करने और हस्तकला को नया आयाम देने वाला यह ‘जहानाबाद मॉडल’ आज देश के उन किसानों के लिए मिसाल है. जो पराली प्रबंधन से जूझ रहे हैं.
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