Computer Wale Bhaiya Success Story: खंडवा के सुरुगांव जोशी गांव के दो भाइयों ललित और मनीष नामदेव ने 2018 में सिर्फ 5 छात्रों से कंप्यूटर इंस्टीट्यूट शुरू किया था. आज उनके संस्थान में 200 से ज्यादा छात्र ट्रेनिंग ले रहे हैं और 240 से अधिक छात्रों का चयन सरकारी नौकरियों में हो चुका है. दर्जी के परिवार से आने वाले इन भाइयों ने मेहनत और लगन से अपनी अलग पहचान बनाई है. डिजिटेक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी आज खंडवा में भरोसेमंद नाम बन चुका है. जानिए कैसे गांव से शुरू हुआ यह सफर डिजिटल सफलता की मिसाल बन गया.
2018 में सिर्फ 5 बच्चों से शुरुआत
साल 2018 में दोनों भाइयों ने अपने कंप्यूटर इंस्टीट्यूट की नींव रखी. उस समय उनके पास सिर्फ 5 छात्र थे. संसाधन सीमित थे, जगह छोटी थी और आर्थिक हालात भी बहुत मजबूत नहीं थे. दोनों पहले दूसरे संस्थानों में नौकरी करते थे, लेकिन मन में हमेशा खुद का कुछ करने का सपना था. दोस्तों ने करीब 2 लाख रुपये की मदद की. उसी भरोसे और हौसले के साथ उन्होंने अपने इंस्टीट्यूट की शुरुआत कर दी.
दर्जी के बेटे, लेकिन सोच बड़ी
दोनों भाइयों के पिता गांव में दर्जी का काम करते हैं. साधारण परिवार, सीमित आमदनी और ढेर सारी जिम्मेदारियां इन्हीं हालातों में पले-बढ़े ललित और मनीष ने कभी हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने तय कर लिया था कि गांव में रहकर ही कुछ ऐसा करेंगे, जिससे गांव के बच्चों को शहर जाने की जरूरत न पड़े.
आज 200 से ज्यादा छात्र ले रहे ट्रेनिंग
आज उनके डिजिटेक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में 200 से ज्यादा छात्र ट्रेनिंग ले रहे हैं. हर महीने नए छात्र जुड़ रहे हैं. यहां बेसिक कंप्यूटर, टैली अकाउंटिंग, GST, एडवांस कोर्स और कई तकनीकी कोर्स सिखाए जाते हैं. खास बात यह है कि ट्रेनिंग के साथ प्लेसमेंट की सुविधा भी दी जाती है, जिससे बच्चों को सीधे नौकरी के मौके मिलते हैं.
240 से ज्यादा छात्रों का सरकारी नौकरी में चयन
ललित और मनीष का दावा है कि अब तक उनके यहां से ट्रेनिंग लेने वाले 240 से ज्यादा छात्रों का चयन सरकारी नौकरियों में हो चुका है. यह आंकड़ा ही उनकी मेहनत की गवाही देता है. ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के छात्र यहां से सीखकर आज अच्छी नौकरी कर रहे हैं. यही वजह है कि इलाके में लोग उन्हें प्यार और सम्मान से “कंप्यूटर वाले भैया” या “नामदेव सर” कहकर बुलाते हैं.
सिर्फ कोर्स नहीं, आत्मनिर्भरता का सपना
मनीष नामदेव कहते हैं कि उनका मकसद सिर्फ कंप्यूटर सिखाना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है. वे चाहते हैं कि गांव के बच्चे भी डिजिटल दुनिया से जुड़ें और अपना करियर खुद बनाएं. गांव से शुरू हुआ यह छोटा सा कदम आज बड़ी सफलता की कहानी बन चुका है. “कंप्यूटर वाले भैया” सिर्फ पढ़ा नहीं रहे, बल्कि सैकड़ों युवाओं के सपनों को नई दिशा दे रहे हैं.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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