1953 में खंचंद रामनानी ने हैदराबाद के मोज़्ज़म जाही मार्केट में एक छोटी सी दुकान खोली और इसका नाम रखा कराची बेकरी. नाम इसलिए रखा क्योंकि कराची उनकी पुरानी याद था, जिसे वे कभी भूलना नहीं चाहते थे. शुरू में दुकान बहुत छोटी थी, वे थर्ड पार्टी से बिस्किट और ब्रेड लेकर बेचते थे. बंटवारे के बाद सब कुछ नया था, पैसे कम थे, मुश्किलें ढेर सारी थीं, लेकिन परिवार ने मेहनत से काम संभाला. 1960 के दशक में उन्होंने खुद हाथ से बिस्किट बनाने शुरू किए. सबसे पहले फ्रूट बिस्किट और उस्मानिया बिस्किट बनाए, जिसने जल्दी ही लोगों के दिल जीत लिए. फ्रूट बिस्किट में बादाम, पिस्ता, काजू जैसे अच्छे टुकड़े डाले जाते थे, स्वाद इतना लाजवाब कि हैदराबाद के लोग, टूरिस्ट, बिजनेसमैन सब लाइन लगाकर डिब्बे ले जाते थे. छोटी सी किचन में वह इन्हें बनाते थे ये, लेकिन टेस्ट इतना अच्छा कि मशहूर हो गए.
कराची बेकरी ने दुनियाभर में कमाया नाम
धीरे-धीरे डिमांड इतनी बढ़ गई कि बिजनेस बड़ा होने लगा. परिवार ने कभी क्वालिटी से समझौता नहीं किया, इसलिए एक्सपैंशन में समय लगा. 2007 में दूसरी ब्रांच बंजारा हिल्स में खुली. उसके बाद तेजी आई और अब कराची बेकरी सिर्फ बिस्किट तक सीमित नहीं रही. उन्होंने केक, कुकीज, स्वीट्स, नमकीन, फ्रेंच पैटिसरी जैसी ढेर सारी चीजें शुरू कीं. कुल 13 कैटेगरी में 50 से ज्यादा तरह के प्रोडक्ट्स हैं, अलग-अलग फ्लेवर में बिस्किट और केक सब मिलते हैं. कैफे और रेस्टोरेंट भी खोले जहां अच्छा खाना और माहौल मिलता है.
आज कराची बेकरी पूरे भारत में फैली हुई है. हैदराबाद के अलावा दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में आउटलेट्स हैं. 2025 तक 36 से ज्यादा आउटलेट्स हो चुके हैं. प्रोडक्ट्स 20 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट होते हैं, जैसे अमेरिका, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, गल्फ देश. छह मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जहां रोजाना 10 टन से ज्यादा प्रोडक्ट्स बनते और पैक होते हैं. 1000 से ज्यादा लोग काम करते हैं. फ्रूट बिस्किट अभी भी हाथ से बनते हैं, ब्रिक ओवन में, पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए. वित्त वर्ष2024 में कंपनी का रेवेन्यू ₹42.3 करोड़ रहा था.
हर घर तक पहुंचा ब्रांड
खास बात ये है कि यह पूरा बिजनेस फैमिली रन है. खंचंद रामनानी के बेटे लेखराज रामनानी और पोते जैसे राजेश, हरीश, विजय रामनानी अब संभालते हैं. वे रोज खुद इंग्रीडिएंट्स मिक्स करते हैं, क्वालिटी पर पूरा ध्यान रखते हैं. साल 2019 और 2025 में नाम को लेकर कुछ विवाद हुए, कुछ लोगों ने विरोध किया, लेकिन परिवार ने साफ कहा कि यह 100 फीसदी इंडियन ब्रांड है, नाम सिर्फ पुरानी याद के लिए है. सिंधी हिंदू परिवार ने बंटवारे में सब खोया, लेकिन मेहनत से दोबारा सब कुछ बनाया.
परिवार के एक सदस्य ने टाइम्स को बताया कि लोग आज भी कराची बेकरी को उसके खास स्वाद की वजह से पसंद करते हैं. हैदराबाद में चार पीढ़ियां ऐसी हैं जो बचपन से इनके बिस्किट खाते हुए बड़ी हुई हैं. शुरुआत में खंचंद रामनानी ट्रांसपोर्टरों को कोयला सप्लाई करते थे और उसी कोयले पर ब्रेड पकाने लगे. बाद में उन्होंने कुकीज और फ्रूट बिस्किट बनाना शुरू किया, जो आज दुनिया के कई देशों में भेजे जाते हैं.
कराची बेकरी आज हैदराबाद की शान बनी हुई है. ये फ्रूट बिस्किट हर घर की चाय के साथ जरूरी हो गए. इससे ये बात तो साफ होती है कि मुश्किल हालात में भी अगर हिम्मत और ईमानदारी से काम किया जाए तो बड़ा सपना पूरा हो सकता है. खाली हाथ आए खंचंद रामनानी ने करोड़ों का एम्पायर खड़ा किया, जो आज हजारों परिवारों को रोजगार देता है और पुराना स्वाद जीवित रखता है.
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