Success Story: झारखंड के पलामू जिले का मनातू प्रखंड जो कभी नक्सली हलचल और अफीम की अवैध खेती के लिए बदनाम था. अब अपनी नई पहचान ‘स्ट्रॉबेरी हब’ के रूप में बना रहा है. पुलिस प्रशासन की सख्ती और JSLPS की पहल ने यहाँ के किसानों की तकदीर बदल दी है. किसान राधेश्याम प्रसाद इस बदलाव के सबसे बड़े उदाहरण हैं. कभी अफीम की खेती के साये में रहने वाले इस इलाके में उन्होंने महज ₹50,000 के लोन से स्ट्रॉबेरी की शुरुआत की. आज वे 2 एकड़ में खेती कर रहे हैं. उनका मुनाफा सालाना ₹15 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है. मनातू की स्ट्रॉबेरी अब रांची से लेकर कोलकाता तक के बाजारों की रौनक बढ़ा रही है. ₹250 प्रति किलो तक बिक रही है. यह लाल क्रांति साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिले. तो किसान अवैध रास्तों को छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होकर न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं.
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