- Hindi News
- Business
- US Iran War Impact: UN Warns Of Further Price Hikes As Supply Chains Disrupt
- कॉपी लिंक
अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध का असर दुनियाभर की रसोई पर दिखने लगा है। यूनाइटेड नेशंस (UN) की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमतें पिछले तीन साल में सबसे ऊपर पहुंच गई हैं।
वहीं, फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) की ओर से शुक्रवार को जारी डेटा के अनुसार, अप्रैल में फूड कमोडिटी प्राइस इंडेक्स में 1.6% की बढ़ोत्तरी हुई है। यह पिछले साल से 2.5% ज्यादा है।
इस उछाल की मुख्य वजह वेजिटेबल ऑयल (खाने का तेल), मीट और अनाज की सप्लाई चेन में आई रुकावटें हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी मुश्किलें
ईरान युद्ध अब अपने 10वें हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। हॉर्मुज रूट बंद है। इस रास्ते से डीजल और फर्टिलाइजर (खाद) जैसे खेती के लिए जरूरी सामान की आवाजाही रुक गई है।
खाद और ईंधन महंगा होने से किसानों के लिए खेती करना मुश्किल हो रहा है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा।
वेजिटेबल ऑयल और मीट की कीमतें सबसे ज्यादा बढ़ीं
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर वनस्पति तेलों पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बायो-फ्यूल की मांग बढ़ी है, जिससे वेजिटेबल ऑयल इंडेक्स मार्च के मुकाबले 5.9% चढ़ गया है। यह जुलाई 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।
वहीं, मीट इंडेक्स में 1.2% की बढ़त हुई है, जो अब तक का ऑल-टाइम रिकॉर्ड है। अनाज की कीमतों में भी 0.8% की तेजी देखी गई है।
अभी कंपनियां स्टॉक बेच रहीं, आगे और बढ़ेगी महंगाई
FAO के चीफ इकोनॉमिस्ट मैक्सिमो टोरेरो ने एक इंटरव्यू में बताया कि एग्री-फूड इंडस्ट्री फिलहाल इसलिए बची हुई है, क्योंकि कंपनियां पुराना स्टॉक बेच रही हैं।
उन्होंने कहा, “जैसे ही कच्चे माल और एनर्जी की बढ़ी हुई लागत कंपनियों के खातों में पहुंचेगी, उपभोक्ता (Consumer) के तौर पर हमें महंगाई का तगड़ा झटका लगेगा।”
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह तनाव 90 दिनों से ऊपर खिंचता है, तो 2026 के अंत और 2027 में ‘ग्लोबल फूड क्राइसिस’ (खाद्य संकट) की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
अनाज की पैदावार कम होने की आशंका
खराब मौसम और 2026 में गेहूं की बुआई कम होने की खबरों ने भी अनाज के दाम बढ़ा दिए हैं। खाद की बढ़ती कीमतों की वजह से किसान अब ऐसी फसलें उगाने पर विचार कर रहे हैं, जिनमें फर्टिलाइजर का इस्तेमाल कम होता हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि कमोडिटी मार्केट में आई इस तेजी का असर रिटेल मार्केट तक पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन खाने की महंगाई बढ़ना अब तय है।
20 जरूरी चीजों में से 16 के दाम 36% तक बढ़े
बैंक ऑफ बड़ौदा के ‘एसेंशियल कमोडिटी इंडेक्स’ के मुताबिक, भारत में अप्रैल महीने में महंगाई सूचकांक सालाना 1.1% और मासिक आधार पर 0.3% बढ़ा। यह अगस्त, 2025 के बाद सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी है। बीते महीने आम जरूरत की 20 में से 16 वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं हैं।
खाने के तेल, टमाटर और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों में 36% तक बढ़ोतरी ने अप्रैल में रिटेल महंगाई 4% तक पहुंचा दी है। आगामी महीनों में महंगाई और बढ़ने का जोखिम बना हुआ है क्योंकि मई में भी कीमतें बढ़ रही हैं।

————————–
ये खबर भी पढ़ें…
साबुन-बिस्किट से लेकर तेल तक सब महंगा होगा: डाबर, HUL सहित FMCG कंपनियां दाम बढ़ाएंगी; पैकेजिंग और कच्चे माल की लागत बढ़ी

FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनी डाबर इंडिया ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। कंपनी का कहना है कि पैकेजिंग मटेरियल की बढ़ती कीमतों और मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ने के कारण इनपुट कॉस्ट बढ़ गई है।
डाबर के अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और नेस्ले जैसी कंपनियां भी महंगाई के दबाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में आपके घर का बजट बिगड़ सकता है और साबुन, तेल, बिस्किट जैसे रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
