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किल बे कहते हैं कि मैं युवाओं को इस काम की सलाह देता हूं क्योंकि इसे “एआई’ भी नहीं छीन सकता है।
मैनहट्टन की छोटी सी दुकान 85 कस्टम टेलर में सिलाई मशीन पर झुके हुए किल बे एक ड्रेस की तुरपाई कर रहे हैं। तभी एक ग्राहक उनके पास आता है। उसके हाथ में एक विंटेज टॉमी हिलफिगर जैकेट है, जिसे वह फिट करवाना चाहता है। उसने पुराने कपड़ों की दुकान से महज 20 डॉलर (1850 रुपए) में यह ड्रेस खरीदी है।
लेकिन इसे सही आकार देने के लिए किल बे को 280 डॉलर (करीब 25,928 रुपए) देने को तैयार है। किल बे कहते हैं कि कुछ साल पहले कीमत का यह अंतर अजीब लगता, लेकिन आज यही मांग उनकी दुकान की मशीन के पहिए घुमा रही है।
63 वर्षीय किल बे ने 17 साल की उम्र में अपने मूल देश दक्षिण कोरिया में टेलरिंग की ट्रेनिंग शुरू की थी। आज वह अमेरिका में उस घटती हुई पीढ़ी का हिस्सा हैं, जो हाथ के हुनर में माहिर है। जैसे-जैसे पुराने दर्जी रिटायर हो रहे हैं, उनके काम की मांग उतनी ही बढ़ती जा रही है। कम वेतन और कठिन काम के कारण नई पीढ़ी इस काम को अपनाने से बच रही है। अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक, पिछले 10 सालों में पेशेवर दर्जियों की संख्या में 30% की गिरावट दर्ज हुई है। फिलहाल पूरे देश में सिर्फ 17,000 से भी कम कुशल दर्जी बचे हैं।
इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की औसत उम्र 54 साल है। जो दूसरी नौकरियों के मुकाबले करीब 12 साल ज्यादा है। यहां करीब 40 प्रतिशत दर्जी, ड्रेसमेकर विदेशी मूल के हैं। इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी मेक्सिको, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और चीन से आए लोगों की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युवाओं को इस पेशे की ओर आकर्षित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में ‘कस्टम फिटिंग’ इतना लंग्जरी हो गाएगा, जिसे केवल अमीर लोग ही वहन कर पाएंगे।
फास्ट फैशन के दौर में पली-बढ़ी पीढ़ी अब टेलर्स के पास जा रही है। कोई रेडीमेड कपड़ों को कस्टम फिट देना चाहता है, तो कोई पुराने कपड़ों को नया जीवन। दिलचस्प है कि वजन घटाने वाली दवाओं के कारण भी दर्जियों का काम बढ़ गया है। लोग वजन कम होने के बाद अपनी ढीली पैंटों की कमर कम कराने और आस्तीनें फिट कराने पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि कुशल हाथों की कमी के बावजूद, यह बाजार सालाना 5% की रफ्तार से बढ़ रहा है।
यह काम एआई भी नहीं छीन सकता, क्योंकि हर शख्स की नाप अलग: किल बे
किल बे मुस्कुराते हुए कहते हैं कि मैं युवाओं को इस काम की सलाह देता हूं क्योंकि इसे “एआई’ भी नहीं छीन सकता है। एआई पैटर्न तो बना सकता है, लेकिन वह एक दर्जी के हाथ की कारीगरी की नकल नहीं कर सकता। हर शरीर अलग है, हर आकार अलग है। अगर मैं आज यह दुकान बंद कर दूं, तो मैं कहीं भी जाकर तुरंत काम ढूंढ सकता हूं। हालांकि अमेरिका में दर्जी की कमी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिका को मैन्युफैक्चरिंग बनाने के मिशन के लिए बड़ा झटका है।
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