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पाकिस्तान और अफगानिस्तान में युद्ध की शुरुआत हो चुकी है. इसका नुकसान देश की कुछ कंपनियों को भी हो सकता है. भारत की फार्मा कंपनी जायडस और सरकारी कंपनी सेल ने अफगानिस्तान में बड़ा निवेश किया है और युद्ध आगे बढ़ने से इन दोनों कंपनियों को नुकसान हो सकता है.
भारत ने अफगानिस्तान में कितने प्रोजेक्ट में निवेश किया है.
भारत ने पिछले ढाई दशक में अफगानिस्तान कई प्रोजेक्ट में हाथ बंटाया है. यहां तक कि अफगानिस्तान की संसद का निर्माण भी भारत ने ही कराया है. अफगानिस्तान के कई इन्फ्रा प्रोजेक्ट जैसे सड़कें, सलमा डैम आदि में भी भारतीय कंपनियों ने बड़ा निवेश किया है. इन्फ्रा के अलावा भारत की दवा कंपनियों ने भी वहां मोटा पैसा लगाया है. पिछले दिनों अफगानिस्तान ने भारतीय कंपनियों को सोने के खनन का भी न्योता दिया था. इसमें अभी तक भले ही किसी कंपनी ने हाथ न डाला हो, लेकिन आने वाले समय में भारतीय कंपनियां जरूर इस दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही हैं.
अफगानिस्तान में भारत का कितना निवेश
भारत ने अफगानिस्तान में पिछले ढाई दशक में करीब 3 अरब डॉलर यानी 27 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का निवेश किया है. सिर्फ इन्फ्रा सेक्टर की बात करें तो भारत ने अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से ज्यादा विकास परियोजनाओं को पूरा किया है. विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, साल 2021 तक भारत ने अफगानिस्तान में इन्फ्रा, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें और बिजली जैसे सेक्टर में बंपर निवेश किया है. इसके अलावा स्कूल, क्लिनिक, कम्युनिटी इन्फ्रा जैसी छोटी परियोजनाओं में भी निवेश किया है.
- इन प्रोजेक्ट में किया है सीधा निवेश
- Zaranj-Delaram Highway : अफगानिस्तान की 218 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण पर करीब 15 करोड़ डॉलर भारत ने खर्च किए हैं. यह सड़क चाबहार पोर्ट तक कनेक्ट करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है.
- Afghan-India Friendship Dam : इसे सलमा डैम के नाम से भी जाना जाता है, जो हेरात प्रांत में पड़ता है. इस डैम से 42 मेगावाट बिजली बनाई जाती है और 75 हजार हेक्टेयर की सिंचाई भी होती है. इसे बनाने पर भारत ने करीब 29 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं.
- Afghan Parliament Building : काबुल में बनी नई संसद के निर्माण पर भी भारत ने 17 से 20 करोड़ डॉलर का निवेश किया है.
- Power Transmission Lines : भारत ने पुल-ए-खुमरी से काबुल तक 220 किलोवॉट लाइन और सब-स्टेशन के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाई है. इस सब-स्टेशन से काबुल में बिजली सप्लाई बढ़ी है.
किन कंपनियों ने वहां लगाया है पैसा
- Zydus Lifesciences : भारत की इस फार्मा कंपनी ने अफगानिस्तान के रऊफी इंटरनेशनल ग्रुप के साथ 10 करोड़ डॉलर यानी करीब 900 करोड़ रुपये का एमओयू पिछले साल साइन किया था. इसके तहत भारतीय कंपनी शुरुआत में तो दवाओं का निर्यात करेगी और बाद में अफगानिस्तान में ही अपना लोकल प्रोडक्शन शुरू कर सकती है.
- Steel Authority of India : इस सरकारी कंपनी की अगुवाई वाले समूह ने हाजीगाक लौह अयस्क खदान में बड़ा निवेश किया है. इस खदान से 1.8 अरब टन लौह अयस्क निकालने की योजना है, जिस पर करीब 10 अरब डॉलर यानी 90 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का निवेश किया जाना था. इस स्टील प्लांट के साथ 800 मेगावॉट के पॉवर प्लांट लगाने की भी तैयारी थी. लेकिन, साल 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से यह प्रोजेक्ट रुका हुआ है.
पाक के साथ युद्ध से क्या होगा नुकसान
अफगानिस्तान और पाकिस्तान में युद्ध बढ़ता है तो सबसे ज्यादा नुकसान भारतीय फार्मा कंपनी जायडस को होगा. इससे जायडस के स्थानीय उत्पादन अथवा निर्यात पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. साथ ही सेल की माइनिंग पर भी असर पड़ेगा और उसके खनन प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है. इन दोनों के अलावा अभी किसी अन्य बड़ी कंपनी ने कोई बड़ा निवेश नहीं किया है, लेकिन आने वाले समय में अफगानिस्तार के साथ भारत का व्यापार और बेहतर होने की पूरी संभावना है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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