अडाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 64% बढ़कर ₹4,271 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹2,599 करोड़ का मुनाफा हुआ था। हालांकि, मुनाफे में इस बड़ी बढ़त के बावजूद बुधवार को कंपनी का शेयर करीब 2.48% गिरकर ₹217.80 पर बंद हुआ। रेवेन्यू ₹15,989 करोड़ पहुंचा, टैक्स में भारी कमी से मुनाफा बढ़ा कंपनी का कुल रिपोर्टेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 10% बढ़कर ₹15,989 करोड़ हो गया है। अगर इसमें से पिछले पीरियड्स के एडजस्टमेंट हटा दें, तो कंटीन्यूइंग रेवेन्यू 3.7% की बढ़त के साथ ₹15,059 करोड़ रहा। मुनाफे में आए इस तेज उछाल की मुख्य वजह टैक्स खर्च में आई भारी कमी है। इस तिमाही में कंपनी का टैक्स भुगतान पिछले साल के मुकाबले 83% कम रहा है। कंपनी के ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस और EBITDA में सुधार मार्केट में डिमांड के उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी का ऑपरेटिंग प्रदर्शन मजबूत रहा है। कंपनी का रिपोर्टेड EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) 27% बढ़कर ₹6,498 करोड़ रहा। वहीं कंटीन्यूइंग EBITDA में भी 9.3% की ग्रोथ देखी गई है, जो ₹5,573 करोड़ रही। यह दर्शाता है कि कंपनी की अंडरलाइंग अर्निंग में स्थिरता बनी हुई है। डिमांड में उतार-चढ़ाव और मर्चेंट मार्केट का दबाव 95% कैपेसिटी लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट से सुरक्षित अडाणी पावर ने अपनी कमाई को स्थिर रखने के लिए लॉन्ग टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर फोकस बढ़ाया है। इस तिमाही में कंपनी ने महाराष्ट्र के साथ 1,600 MW और तमिलनाडु के साथ 558 MW के नए PPA साइन किए हैं। इसके साथ ही कंपनी की कुल ऑपरेटिंग कैपेसिटी का करीब 95% हिस्सा लॉन्ग और मीडियम टर्म एग्रीमेंट के तहत सुरक्षित हो गया है। कुल पावर सेल्स वॉल्यूम भी पिछले साल के 26.4 बिलियन यूनिट से बढ़कर 27.2 बिलियन यूनिट रहा। ये खबर भी पढ़ें… बजाज फाइनेंस का मुनाफा 22% बढ़कर ₹5,465 करोड़: निवेशकों को हर शेयर पर ₹6 डिविडेंड देगी कंपनी; राजीव बजाज बोर्ड से इस्तीफा देंगे बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में ₹5,465 करोड़ का शुद्ध मुनाफा यानी नेट प्रॉफिट कमाया है। पिछले साल की इसी तिमाही के ₹4,480 करोड़ के मुकाबले इसमें 22% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कंपनी ने नतीजों के साथ ही यह भी जानकारी दी है कि राजीव बजाज बोर्ड से इस्तीफा दे रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में इस उछाल की बड़ी वजह बैड लोन (फंसे हुए कर्ज) के लिए किए जाने वाले प्रोविजन में कमी आना है। पूरी खबर पढ़ें…
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