अगर आप कम बजट में घर खरीदना चाहते हैं, तो बैंक ऑक्शन एक अच्छा ऑप्शन है। अक्सर बैंकों की नीलामी में एक 3BHK फ्लैट उसी कीमत पर मिल जाता है, जितनी कीमत में उस इलाके में 2BHK की होती है। यह मौका तब मिलता है जब कोई कर्जदार अपने होम लोन की किस्तें (EMI) नहीं चुका पाता और बैंक उस प्रॉपर्टी को जब्त कर नीलामी के जरिए बेच देते हैं। बैंक क्यों करते हैं प्रॉपर्टी की नीलामी? जब कोई लोन डिफॉल्ट करता है तो बैंक ‘सरफेसी एक्ट’ के तहत प्रॉपर्टी कब्जे में ले लेते हैं। बैंक का मकसद मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि बकाया लोन वसूलना होता है। इसीलिए बैंक इन घरों की ‘रिजर्व प्राइस’ बाजार भाव से 25% तक कम रखते हैं ताकि खरीदार जल्दी मिल सकें। 3BHK सस्ता मिलने के पीछे का गणित मार्केट में 2BHK की डिमांड सबसे ज्यादा है, इसलिए इनकी कीमतें तेजी से बढ़ती हैं। इसके उलट, 3BHK की कीमत ज्यादा होने से खरीदार कम होते हैं। नीलामी के दौरान कॉम्पिटिशन कम होने का फायदा उठाकर आप बड़े फ्लैट्स को 2BHK के रेट पर खरीद सकते हैं। नीलामी में शामिल होने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर बिक्री बैंक इन प्रॉपर्टीज को ‘As-is-where-is’ बेसिस पर बेचते हैं। इसका मतलब है कि घर जिस हालत में है, आपको वैसा ही मिलेगा। खरीदने से पहले इन बातों का ध्यान रखें: पेमेंट के लिए सीमित समय मिलता है नीलामी जीतने के बाद 15 से 30 दिनों के भीतर पूरी रकम चुकानी होगी। अगर आप लोन लेना चाहते हैं, तो प्री-अप्रूव्ड लोन का विकल्प रखें। देरी होने पर जमा राशि जब्त की जा सकती है। ₹50 लाख से ज्यादा की प्रॉपर्टी पर 1% TDS काटकर सरकार को जमा करना भी अनिवार्य है। चेकलिस्ट: बोली लगाने से पहले ये 3 काम जरूर करें नॉलेज पार्ट: सरफेसी एक्ट क्या है? यह कानून बैंकों को यह अधिकार देता है कि अगर कोई लोन नहीं चुकाता, तो बैंक बिना कोर्ट गए उसकी गिरवी रखी प्रॉपर्टी को जब्त कर उसे बेच सकता है। खरीदार के लिए यह सुरक्षित होता है क्योंकि बैंक खुद टाइटल की जिम्मेदारी लेता है।
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