Congestion Tax : ट्रैफिक जाम की समस्या से परेशान सरकार एक नया टैक्स लागू कर सकती है. कंजेशन टैक्स लागू करने का प्रस्ताव भी भाजपा के एक पार्षद ने बीएमसी के कमिश्नर को दिया है. उन्होंने अपने प्रस्ताव में कहा कि ट्रैफिक को कम करने के लिए उन कारों पर कंजेशन फीस लगाया जाना चाहिए, जो पीक ऑवर में जाम वाली जगहों पर जाती हैं. इससे ट्रैफिक घटाने और वाहनों की स्पीड बढ़ाने में मदद मिलेगी. भारत में भले ही अभी तक यह प्रस्ताव के स्तर पर हो, लेकिन अमेरिका सहित दुनिया के कई शहरों में इसे पहले से लागू किया जा चुका है.
मुंबई में पहली बार कंजेशन टैक्स लगाए जाने की बात चल रही है.
मुंबई के एक पार्षद ने बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी को पत्र लिखकर कहा है कि शहर के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट्स (CBD) में कंजेशन टैक्स लगाया जाना चाहिए, जिससे वाहनों की संख्या घटाने में मदद मिलेगी. बीजेपी के मकरंद नार्वेकर ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि बिना रोक-टोक निजी वाहनों के इस्तेमाल से हाई-डेंसिटी वाले कमर्शियल इलाकों, खासकर साउथ मुंबई में ट्रैफिक जाम की समस्या और बढ़ गई है. उन्होंने सुझाव दिया कि जिन इलाकों में ट्रैफिक ज्यादा रहता है, वहां निजी वाहनों को, खासकर उन वाहनों को जिनमें सिर्फ एक व्यक्ति बैठा हो, पीक ऑवर्स के दौरान कंजेशन फीस वसूली जानी चाहिए.
कब वसूला जाए कंजेशन टैक्स
प्रस्ताव के अनुसार, सुबह 8 बजे से 11 बजे और शाम 5 बजे से 8 बजे के बीच, जब ट्रैफिक पीक आवर्स में होता है, तब नोटिफाइड सीबीडी क्षेत्रों में प्रवेश करने वाले वाहनों से प्रति एंट्री 50 से 100 रुपये तक शुल्क लिया जा सकता है. इन क्षेत्रों की पहचान शहर में पहले से लगे सीसीटीवी सर्विलांस और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों के जरिए की जा सकती है. इस टैक्स से बचने के लिए लोग निजी वाहनों का प्रयोग बंद करेंगे और प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी.
क्या है कंजेशन टैक्स
इसे कंजेशन प्राइसिंग या कंजेशन चार्ज भी कहा जाता है. यह टैक्स उन वाहनों से लिया जाता है जो व्यस्त सड़कों या भीड़भाड़ वाले शहर के क्षेत्रों में पीक आवर्स के दौरान प्रवेश करते हैं. इसका मकसद ट्रैफिक कम करना, प्रदूषण घटाना और शहरों को तेजी से चलाना है. आमतौर पर शहरों में हाई-ट्रैफिक क्षेत्रों की पहचान की जाती है. जैसे सिटी सेंटर या प्रमुख कॉरिडोर और ड्राइवरों को इन क्षेत्रों में व्यस्त समय (जैसे सुबह और शाम की भीड़) में प्रवेश या ड्राइव करने पर शुल्क देना पड़ता है. वाहनों को ट्रैक करने के लिए कैमरे, नंबर प्लेट रिकग्निशन, जीपीएस या इलेक्ट्रॉनिक टैग का इस्तेमाल किया जाता है और टोल बूथ या बैरियर नहीं लगाए जाते. ड्राइवर ऑनलाइन, ऐप्स या प्रीपेड पास के जरिए शुल्क अदा करते हैं और अगर वे कंजेशन टैक्स नहीं देते तो उन पर जुर्माना लगाया जाता है.
अभी कहां लागू है कंजेशन टैक्स
- सिंगापुर (Singapore) : दुनिया में सबसे पहले साल 1975 में लागू हुआ. यहां टोल रेट समय, लोकेशन, वाहन प्रकार और रीयल-टाइम ट्रैफिक के आधार पर बदलता है. इससे ट्रैफिक 20-45% कम हुआ.
- यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom): लंदन में साल 2003 से London Congestion Charge लागू, जो 15 पाउंड वसूला जाता है. ट्रैफिक 30% कम हुआ, बस स्पीड बढ़ी.
- स्वीडन (Sweden): साल 2006 में ट्रायल आधार पर लागू किया और 2007 से स्थायी रूप से लागू हो गया है.
- गोथेनबर्ग (Gothenburg) : इस यूरोपीय देश में साल 2013 से लागू है, ट्रैफिक काफी कम हुआ.
- इटली (Italy) : राजधानी मिलान में साल 2012 में एमिशन-बेस्ड चार्ज लागू हुआ, जिससे ट्रैफिक 28% कम और कार्बन का उत्सर्जन 35% कम हुआ है.
- संयुक्त राज्य अमेरिका (United States): न्यूयॉर्क सिटी (New York City) में साल 2025 से लागू, जो ट्रैफिक घटाने और स्पीड बढ़ाने में मददगार रहा.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.