बॉलीवुड स्टार मलिका शेरावत व आज़ादी से पहले के देश के सबसे बड़े दानवीर सेठ छाजुराम लांबा के गांव अलखपुरा की बेटियों ने गांव को दी नई पहचान। अब अलखपुरा को कहा जाने लगा मिनी ब्राज़ील। सेना व रेलवे में नौकरी कर आत्मनिर्भर बन रहीं बेटियां। घर चलाने में भी हुई सक्षम।
दरअसल, जिले के अलखपुरा गांव को दो दशक पहले तक बॉलीवुड की स्टार मलिका शेरावत के चलते जाना जाता था. उनसे पहले उनके पड़दादा एवं आज़ादी से पहले देश के सबसे बड़े दानवीर सेठ छाजुराम लांबा के नाम से जाना जाता था. हालांकि, अब अलखपुरा गांव की पहचाना उसकी बेटियों की बदौलत होने लगी है. वो बेटियां, जो फुटबॉल में गांव का नाम विश्व स्तर पर चमकाने लगी हैं. बता दें कि इस गांव की लगभग हर बेटी फुटबॉल खेलती है. कई बार नेशनल व इंटरनेशनल लेवल पर मेडल पाकर नौकरियाँ पा चुकी हैं.
फुटबॉल कोच सोनिका बिजारनिया ने बताया कि इस गांव के सरकारी स्कूल के पीटीआई गोवर्धन शर्मा ने साल 2005 के आसपास लड़कों को कबड्डी खिलाना शुरू किया. फिर लड़कियां भी खेलने लगी. हालांकि, लड़कों कीं परफ़ॉर्मेंस अच्छी नहीं रही तो उन्होंने लड़कियों को फुटबॉल खिलाना शुरू किया. देखते ही देखते लड़कियों ने ज़िला स्तर से स्टेट लेवल पर मेडल जीते. इसके बाद गाँव की लड़कियों का रुझान बढ़ा तो बेटियों ने 10 बार सुब्रतो कप में भाग लिया.
कोच सोनिका ने बताया कि फिलहाल अलखपुरा गांव की 7 बेटियों को इंडिया टीमों में चयन हुआ है. इसमें संजू यादव का सीनियर भारतीय टीम में, पूजा जाखड़, मुसकान, पारुल, हिमांशु व रितु का अंडर-20 तो स्वेता का अंडर-17 टीम में चयन हुआ है. ये सभी बेटियां कैंप में शामिल होने अलग अलग राज्यों में और संजू टर्की गई हुई हैं. कोच का कहना है कि ये बेटियां नाम व दाम दोनों कमा रही है. पूजा जाखड़ के पिता का निधन हो चुका है. वो महज 18 साल की हैं लेकि अपनी मेहनत से पाए मेडल व स्कॉलरशिप से अपने पूरे परिवार का पालन पोषण कर करती है. कोच का कहना है कि आधुनिक उपकरण मिलते रहे तो हमारी बेटियां और बेहतर कर सकती हैं.
फुटबॉल खेल रही बेटी एवं हाल ही में सेना में चयनित पायल और अंजली ने बताया कि गांव की 200 से ज्यादा लड़कियां फुटबॉल खेलती हैं. जैसे जैसे पहले लड़कियों के मेडल आए तो हर घर की हर बेटी का रुझान बढ़ा. वो कहती हैं कि हमारा लक्ष्य गांव व देश का नाम रोशन करना और आत्मनिर्भर बनना है.

गाँव की लड़कियों का रुझान बढ़ा तो बेटियों ने 10 बार सुब्रतो कप में भाग लिया.
गौर रहे कि लोढ़ छाजुराम को अलखपुरा गांव की बेटियों ने अपनी मेहनत से फुटबॉल की ऐसी अलख जगाई कि अब इस गांव में बेटी के पैदा होने को अभिशाप नहीं, बल्की गोल्ड मेडल के तौर पर माना जाने लगा है. ऐसे में जरूरत है इस कारवां को आधुनिक उपकरण देकर और आगे बढ़ाने की.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
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