भारत के छोटे स्टार्टअप्स तेजी से बड़ी विदेशी कंपनियों को टक्कर दे रहे हैं और कई सेक्टर्स में उन्हें पीछे भी छोड़ रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण लोकल बाजार की गहरी समझ, कम लागत और मोबाइल फर्स्ट अप्रोच है. 2025 और 2026 में फिनटेक, क्विक कॉमर्स और ईवी सेक्टर में भारतीय कंपनियों की पकड़ बहुत मजबूत हुई है और वे ग्लोबल दिग्गजों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं.
भारतीय स्टार्टअप्स की सबसे बड़ी ताकत लोकल इनसाइड है. छोटे शहरों और गांवों के यूजर्स की भाषा, पेमेंट सिस्टम और कीमत की संवेदनशीलता को समझकर उन्होंने अपने प्रोडक्ट डिजाइन किए. मीशो ने सोशल कॉमर्स मॉडल से छोटे शहरों की महिलाओं को ऑनलाइन बिजनेस से जोड़ा और कम कीमत में प्रोडक्ट बेचकर अमेजन और फ्लिपकार्ट को कड़ी चुनौती दी.
छोटे स्टार्टअप कैसे हुए सफल
कम लागत और तेज एक्जीक्यूशन भी भारतीय स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाता है. भारत में इंजीनियर्स और टेक टैलेंट की बड़ी संख्या है जिससे कंपनियां कम खर्च में टेक्नोलॉजी विकसित कर पाती हैं. रेजरपे ने यूपीआई और लोकल पेमेंट पर फोकस करके स्ट्राइप और पेपाल जैसी विदेशी कंपनियों से भारत में बड़ा मार्केट शेयर हासिल किया.
सरकारी सपोर्ट
सरकारी सपोर्ट ने भी बड़ी भूमिका निभाई है. स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया और पीएलआई जैसी योजनाओं से टैक्स छूट और फंडिंग मिली. ओला इलेक्ट्रिक ने ईवी पॉलिसी का फायदा उठाकर इलेक्ट्रिक स्कूटर मार्केट में मजबूत पकड़ बना ली और ग्लोबल कंपनियों से पहले बड़े स्तर पर ग्रोथ हासिल की.
हाइपर लोकल मॉडल
मोबाइल फर्स्ट और हाइपर लोकल मॉडल भी भारतीय स्टार्टअप्स की जीत का कारण है. भारत में ज्यादातर यूजर्स मोबाइल से इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जेप्टो और ब्लिंकिट जैसे स्टार्टअप्स ने 10 मिनट डिलीवरी मॉडल से अमेजन फ्रेश और डूरडैश को चुनौती दी. 2025 और 2026 में स्टार्टअप्स का फोकस प्रॉफिटेबिलिटी पर भी बढ़ा है. पहले जहां सिर्फ ग्रोथ पर ध्यान था, अब कंपनियां यूनिट इकोनॉमिक्स और मुनाफे पर काम कर रही हैं. जोमैटो और ब्लिंकिट ने प्रॉफिटेबिलिटी दिखाकर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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