रोनाल्ड वेन का जन्म 1934 में अमेरिका के शिकागो में हुआ था. जब वे ऐपल से जुड़े, तब उनकी उम्र 42 साल थी, जबकि स्टीव जॉब्स और वोज्नियाक अभी अपनी उम्र के दूसरे दशक में थे. रोनाल्ड तजुर्बेकार थे और उन्होंने पहले भी अपना बिजनेस करने की कोशिश की थी. वे एक इंजीनियर थे और उनकी मुलाकात स्टीव जॉब्स से तब हुई जब दोनों ‘अटारी’ नाम की गेमिंग कंपनी में काम करते थे. जॉब्स और वोज्नियाक के बीच अक्सर तकनीकी बातों को लेकर बहस होती थी, और रोनाल्ड वहां एक सुलझे हुए बड़े भाई की तरह थे. जॉब्स को लगा कि रोनाल्ड का अनुभव उनकी नई कंपनी के लिए बहुत जरूरी होगा, इसलिए उन्होंने रोनाल्ड को 10 परसेंट हिस्सेदारी का ऑफर दिया ताकि वे दोनों पार्टनर्स के बीच एक ‘अंपायर’ का काम कर सकें.
अपने हाथों से टाइप किया पार्टनरशिप का एग्रीमेंट
1 अप्रैल 1976 को जब ऐपल कंप्यूटर कंपनी की नींव रखी गई, तो रोनाल्ड ने ही अपने हाथों से पार्टनरशिप का एग्रीमेंट टाइप किया था. इतना ही नहीं, ऐपल का पहला लोगो, जिसमें आइजैक न्यूटन एक पेड़ के नीचे बैठे थे, वह भी रोनाल्ड ने ही डिजाइन किया था. कंपनी की शुरुआत हो चुकी थी, लेकिन रोनाल्ड के मन में एक गहरा डर बैठा हुआ था. जॉब्स और वोज्नियाक के पास खोने के लिए कुछ नहीं था, उनके पास न कोई बड़ी संपत्ति थी और न ही पिछला कोई कर्ज. लेकिन रोनाल्ड पहले एक स्लॉट मशीन बिजनेस में नाकाम हो चुके थे और उनके पास अपनी कुछ जमापूंजी और घर था. उस समय ऐपल एक ‘पार्टनरशिप’ कंपनी थी, जिसका मतलब था कि अगर कंपनी कर्ज में डूबती है, तो लेनदार किसी भी पार्टनर की निजी संपत्ति को जब्त कर सकते थे.
कर्ज ने उड़ा दी रोनाल्ड की रातों की नींद
जब स्टीव जॉब्स ने ऐपल के पहले बड़े ऑर्डर के लिए 15,000 डॉलर का कर्ज लिया, तो रोनाल्ड की रातों की नींद उड़ गई. उन्हें लगा कि अगर यह प्रोजेक्ट फेल हुआ, तो बैंक उनके घर और बैंक अकाउंट पर कब्जा कर लेंगे. इसी डर के चलते, कंपनी शुरू होने के मात्र 12 दिन बाद, रोनाल्ड वेन ने अपना नाम पीछे खींचने का फैसला किया. उन्होंने अपनी 10 फीसदी हिस्सेदारी सिर्फ 800 डॉलर में वापस कंपनी को बेच दी. कुछ समय बाद कंपनी ने उन्हें 1500 डॉलर और दिए, ताकि वे भविष्य में कभी कोई दावा न कर सकें. उन्होंने एक झटके में उस सुनहरे भविष्य से नाता तोड़ लिया जिसकी कल्पना भी उस वक्त किसी ने नहीं की थी.
छोटी-मोटी नौकरी करने लौट गए रोनाल्ड वेन
ऐपल का शुरुआती सफर बहुत उतार-चढ़ाव भरा था. जॉब्स की जिद और वोज्नियाक की काबिलियत ने ऐपल-1 और फिर ऐपल-2 कंप्यूटर को बाजार में उतारा. धीरे-धीरे कंपनी गैराज से निकलकर बड़ी बिल्डिंग्स में पहुंच गई. रोनाल्ड वेन वापस अपनी पुरानी जिंदगी में लौट गए और छोटी-मोटी नौकरियां करने लगे. उन्होंने कभी भी अपने फैसले पर सार्वजनिक रूप से अफसोस नहीं जताया, लेकिन दुनिया उन्हें हमेशा ‘सबसे बदनसीब पार्टनर’ के तौर पर देखती रही. 1980 में जब ऐपल शेयर बाजार में लिस्ट हुई, तो देखते ही देखते जॉब्स और वोज्नियाक करोड़पति बन गए.
फिर भी खुश थे रोनाल्ड वेन!
रोनाल्ड वेन केवल सुरक्षा चाहते थे, जबकि जॉब्स और वोज्नियाक जोखिम लेने के लिए तैयार थे. ऐपल ने जब मैकिन्तोश लॉन्च किया और बाद में आईफोन के जरिए पूरी दुनिया के मोबाइल मार्केट को बदल दिया, तब तक रोनाल्ड एक गुमनाम जिंदगी जी रहे थे. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें अपनी माली हालत से ज्यादा इस बात की खुशी है कि वे उस ऐतिहासिक पल का हिस्सा थे. हालांकि, सच यह भी है कि बुढ़ापे में उन्हें अपना गुजारा करने के लिए अपनी सोशल सिक्योरिटी चेक पर निर्भर रहना पड़ा और वे लास वेगास के पास एक छोटे से घर में रहने लगे.
बाद में खूब महंगा बिका पार्टनरशिप पेपर, मगर…
रोनाल्ड की जिंदगी में एक और बड़ा मोड़ तब आया, जब उन्होंने उस ओरिजिनल पार्टनरशिप पेपर को भी बेच दिया, जिसे उन्होंने 1976 में टाइप किया था. उन्होंने वह कागज 1990 के दशक में महज 500 डॉलर में बेच दिया. वही कागज बाद में 2011 में एक नीलामी के दौरान करीब 1.6 मिलियन डॉलर में बिका. किस्मत ने उनके साथ बार-बार मजाक किया, लेकिन रोनाल्ड ने हमेशा यही कहा कि वे उन दो ‘तूफानी’ लड़कों के साथ काम करके शायद मानसिक रूप से बीमार हो जाते, क्योंकि जॉब्स के साथ काम करना बेहद तनावपूर्ण था.
आज रोनाल्ड वेन 90 साल से ज्यादा के हो चुके हैं. वे एक साधारण घर में रहते हैं और आज भी पुरानी यादें संजोते हैं. ऐपल दुनिया की पहली 3 ट्रिलियन डॉलर वाली कंपनी बनी, आईफोन ने दुनिया बदल दी, लेकिन इस पूरी कामयाबी की इबारत लिखने वाला तीसरा हाथ आज गुमनामी में है. उनकी कहानी बताती है कि बिजनेस में सिर्फ दिमाग और हुनर ही काफी नहीं होता, बल्कि सही समय पर जोखिम लेने का हौसला भी होना चाहिए. रोनाल्ड ने अपनी सुरक्षा को अपनी दौलत से ऊपर रखा और शायद यही वजह है कि आज वे बिना किसी मलाल के एक शांत जिंदगी जी रहे हैं, भले ही उनकी जेब उतनी भारी न हो जितनी हो सकती थी.
Discover more from Business News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.